भगवान हनुमान नाम मंत्र
अंजनीपुत्र
मातृ-पितृ भक्ति, सेवा भाव का विकास एवं गृह कलेश का समूल नाश।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
मातृ-पितृ भक्ति, सेवा भाव का विकास एवं गृह कलेश का समूल नाश।
इस मंत्र से क्या होगा?
मातृ-पितृ भक्ति, सेवा भाव का विकास एवं गृह कलेश का समूल नाश
जाप विधि
वात्सल्य भाव से माता-पिता की सेवा करते हुए स्मरण।
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ॐ नमः शिवाय
kavach mantraश्रीम क्लीम सरस्वती बुद्ध जन्य स्वाहा सततम मंत्र राजोयम दक्षिणे मां सदावतु ऐम ह्रीम श्रीम क्लीम त्र्यक्षरो मंत्रो नैऋत्यम सर्वदावतु ओम ऐकवासिन्य स्वाहा मां वारुणेवतु ओम सर्वांबिकाय स्वाहा वायव्यमा सदावतु ओम ऐम श्रीम क्लीम गद्यवासिन्य स्वाहा माम उत्तरेवतु ऐम सर्वशास्त्र वासिन्ये स्वाहान्य सदा ओम ह्रीम सर्व पूजिता स्वाहा चोरध्वं सदावतु ओम ह्रीम पुस्तक वासिन्य स्वाहा धोमांम सदावतु ओम ग्रंथ बीज स्वरूपाय स्वाहा मां सर्वतो वतु इति कथित विप्र ब्राह्म मंत्र विग्रहम इदम विश्व जयं नाम कवचम ब्रह्म रूपकम पंचलक्ष जपे नैव सिद्धमु कवचम भवे यदि सिद्ध कवचो बृहस्पति समो भवे महा वाग्मी कविंद्र त्रैलोक्य विजयी भवेत 27
beej mantraश्रीं
ugra mantraॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं असितांग भैरवाय नमः
dhyan mantraॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै। तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
stotra mantraऊं नमो भगवते तस्मै यत एतच्चिदात्मकम । पुरुषायादिबीजाय परेशायाभिधीमहि ॥ 4