वैदिक देवता (इंद्र) नाम मंत्र
सुरेंद्र
सभी देवों का अनुकूल होना एवं समाज में 'देव-तुल्य' प्रतिष्ठा।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
सभी देवों का अनुकूल होना एवं समाज में 'देव-तुल्य' प्रतिष्ठा।
इस मंत्र से क्या होगा?
सभी देवों का अनुकूल होना एवं समाज में 'देव-तुल्य' प्रतिष्ठा
जाप विधि
देवताओं या श्रेष्ठ जनों के मध्य सम्मान प्राप्ति हेतु वैखरी उच्चारण।
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ॐ सहस्रार हुं फट्
kavach mantraशम्भुर्मे मस्तकं पातु मुखं पातु महेश्वरः। दन्तपङ्क्तिं च नीलकण्ठोऽप्यधरोष्ठं हरः स्वयम्। कण्ठं पातु चन्द्रचूडः स्कन्धौ वृषवाहनः। वक्षःस्थलं नीलकण्ठः पातु पृष्ठं दिगम्बरः। स्वप्ने जागरणे चैव स्थाणुर्मे पातु सन्ततम्। 8
jap mantraॐ श्रीं क्लीं ह्रीं सप्तशति चण्डिके उत्कीलनं कुरु कुरु स्वाहा
beej mantraहुं
dhyan mantraध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्। वामाङ्कारूढ सीतामुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभं नानालङ्कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डनं रामचन्द्रम्॥
ugra mantraॐ ह्रीं मैं भीमाय नमः