तत्त्वज्ञान (तत्त्वमसि) ज्ञान मंत्र
तत्त्वमसि
जीव और परमतत्त्व की एकता का ज्ञान, अज्ञान-तिमिर का समूल नाश 8।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
जीव और परमतत्त्व की एकता का ज्ञान, अज्ञान-तिमिर का समूल नाश 8।
इस मंत्र से क्या होगा?
जीव और परमतत्त्व की एकता का ज्ञान, अज्ञान-तिमिर का समूल नाश
जाप विधि
गुरु मुख से श्रवण उपरांत निरंतर मनन और अभ्यास 8।
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ॐ नमो नारायणाय
kavach mantraपातु श्रवणे वासरेश्वर घ्राणं धर्म पातु पदन वेदवाहन जीवा मानद पातु कंठ में सुरवंदित स्कंद प्रभाकर पातु वक्ष पातु जन प्रिय पातु पाद द्वादशात्मा सर्व सर्वांग सकलेश्वर यक्ष गन्धर्व राक्षसाः ब्रह्मराक्षस वेतालाः क्षमा दूरा देव पलायंते तस्य संकीर्तना अज्ञात कवच दिव्य यो जपे सूर्य मंत्रम् सिद्धि जायते तस्य कल्पकोटि शतैरपि। इति श्री ब्रह्मयामले त्रैलोक्य मंगलम नाम सूर्य कवचम संपूर्णम। 15
beej mantraग्रां
ugra mantraॐ खें खां खं फट् प्राण-ग्रहासि प्राण-ग्रहासि हुं फट् सर्वशत्रुसंहारणाय शरभशालुवाय पक्षिराजाय हुं फट् स्वाहा
dhyan mantraॐ जटाजूटसमायुक्तमर्धेन्दुकृतलक्षणम्। लोचनत्रयसंयुक्तं पातु मां सर्वतोमुखीम्॥
stotra mantraस वै न देवासुरमर्त्यतिर्यंग न स्त्री न षण्डो न पुमान न जन्तुः । नायं गुणः कर्म न सन्न चासन निषेधशेषो जयतादशेषः ॥ 4