तत्त्वज्ञान (तत्त्वमसि) ज्ञान मंत्र
तत्त्वमसि
जीव और परमतत्त्व की एकता का ज्ञान, अज्ञान-तिमिर का समूल नाश 8।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
जीव और परमतत्त्व की एकता का ज्ञान, अज्ञान-तिमिर का समूल नाश 8।
इस मंत्र से क्या होगा?
जीव और परमतत्त्व की एकता का ज्ञान, अज्ञान-तिमिर का समूल नाश
जाप विधि
गुरु मुख से श्रवण उपरांत निरंतर मनन और अभ्यास 8।
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अच्युत
shanti mantraॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः । वनस्पतयः शान्तिर्विश्वेदेवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वं शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
bhakti mantraॐ श्री त्रिपुरसुन्दर्यै नमः
navgrah mantraॐ वीरध्वजाय विद्महे विघ्नहस्ताय धीमहि तन्नो भौमः प्रचोदयात्।
tantrik mantraॐ ऐं ऐं महाभैरवि एहि एहि ईशानदिशायां बन्धय बन्धय ईशानमुखं स्तम्भय स्तम्भय ईशानशस्त्रं निवारय निवारय सर्वसैन्यं कीलय कीलय पच पच मथ मथ मर्दय मर्दय ॐ ह्लीं वश्यं कुरु करु ॐ ह्लां बगलामुखि हुं फट् स्वाहा
stotra mantraराक्षसक्षोभित: सीतया शोभितो दण्डकारण्यभूपुण्यताकारण:। लक्ष्मणेनान्वितो वानरै: सेवितो- Sगस्त्यसम्पूजितो राघव: पातु माम्।। 9