भगवान श्रीकृष्ण / अच्युताष्टकम् स्तोत्र मंत्र
राक्षसक्षोभित: सीतया शोभितो दण्डकारण्यभूपुण्यताकारण:। लक्ष्मणेनान्वितो वानरै: सेवितो- Sगस्त्यसम्पूजितो राघव: पातु माम्।। 9
श्री हरि भगवान का वशीकरण, प्रभु कृपा की प्राप्ति, भक्ति और भीतरी सुंदरता का विकास 8।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
श्री हरि भगवान का वशीकरण, प्रभु कृपा की प्राप्ति, भक्ति और भीतरी सुंदरता का विकास 8।
इस मंत्र से क्या होगा?
श्री हरि भगवान का वशीकरण, प्रभु कृपा की प्राप्ति, भक्ति और भीतरी सुंदरता का विकास
जाप विधि
भगवान श्रीकृष्ण के निमित्त प्रतिदिन प्रेम और श्रद्धापूर्वक इस अष्टक का पाठ करें। जन्माष्टमी पर विशेष पाठ लाभदायी है 8।
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ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः । सर्वे सन्तु निरामयाः । सर्वे भद्राणि पश्यन्तु । मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
vaidik mantraॐ आ ते वत्सो मनो यमत्परमाच्चित्सधस्थात् । अग्ने त्वां कामये गिरा ॥
sabar mantraधन जैसे चुंबक खींचे लोह गोरख की आज्ञा टले नहीं मिटे साधक का मोह कीड़ा जागे पिंगला जागे सुष्मना का खुले द्वार जब तीनों नाड़ी जागे धन आवे बारंबार जैसे गंगा बहे अविरल जैसे सूरज देत उजास वैसे मेरे घर में लक्ष्मी करे सदा ही वास रुका धन चले बंद धन खुले आवे चहुं ओर से धन गोरख का शब्द सांचा रे सांचा रे गुरु का मन काल का भी काल है गोरख तीनों लोक बसेरा जो गोरख का नाम ले साधक उसका होए उजेरा उठ उठ लक्ष्मी आव बैठ मेरे द्वार गोरख की आज्ञा लेकर आव कर मेरा उद्धार शब्द सांचा पिंड कांचा सांची गुरु की बानी हुकुम गोरखनाथ का चले यही नाथ की निशानी 5
gyan mantraइदं मे ब्रह्म च क्षत्रं चोभे श्रियमश्नुताम् । मयि देवा दधतु श्रियमुत्तमां तस्यै ते स्वाहा ॥
kaamya mantraॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्। तां म आ वह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्॥
bhakti mantraनीलांचल निवासाय नित्याय परमात्मने। बलभद्र सुभद्राभ्यां जगन्नाथाय ते नमः