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उद्देश्य अनुसार मंत्र
भगवान नृसिंह (अनुष्टुप मंत्रराज)

भगवान नृसिंह (अनुष्टुप मंत्रराज) सिद्ध मंत्र

उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम् । नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम् ॥

महासिद्धि की प्राप्ति 64। इस मंत्र के सिद्ध होने पर साधक में सृष्टि, स्थिति, संहार, अनुग्रह और तिरोभाव—ईश्वर के इन पांचों कृत्यों को करने की क्षमता आ जाती है 64। यह काल (समय) और मृत्यु पर पूर्ण विजय प

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारसिद्ध मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

महासिद्धि की प्राप्ति 64। इस मंत्र के सिद्ध होने पर साधक में सृष्टि, स्थिति, संहार, अनुग्रह और तिरोभाव—ईश्वर के इन पांचों कृत्यों को करने की क्षमता आ जाती है 64। यह काल (समय) और मृत्यु पर पूर्ण विजय प्रदान करता है 65।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

महासिद्धि की प्राप्ति 64

02

इस मंत्र के सिद्ध होने पर साधक में सृष्टि, स्थिति, संहार, अनुग्रह और तिरोभाव—ईश्वर के इन पांचों कृत्यों को करने की क्षमता आ जाती है 64

03

यह काल (समय) और मृत्यु पर पूर्ण विजय प्रदान करता है

जाप विधि

३२ लाख जप का महा-पुरश्चरण आवश्यक है 64। लाल ऊनी आसन, लाल धोती, रात्रि १० बजे के बाद या ब्रह्म मुहूर्त 64। २५ प्रकार के महा-न्यास (त्रैलोक्य विजय आदि) किए जाते हैं 64। ३,२०,००० आहुति (पायस, बिल्व), तर्पण और मार्जन का कठोर विधान है 64।

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