सुदर्शन षडाक्षरी सिद्ध मंत्र
ॐ सहस्रार हुं फट्
अत्यंत उग्र सुरक्षा और शत्रुओं का पूर्ण रूप से सिर काटना (आध्यात्मिक व ऊर्जा स्तर पर) 68। यह अस्त्र साधक के मार्ग में आने वाली किसी भी बाधा को प्रलयंकारी अग्नि से भस्म कर देता है 68।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
अत्यंत उग्र सुरक्षा और शत्रुओं का पूर्ण रूप से सिर काटना (आध्यात्मिक व ऊर्जा स्तर पर) 68। यह अस्त्र साधक के मार्ग में आने वाली किसी भी बाधा को प्रलयंकारी अग्नि से भस्म कर देता है 68।
इस मंत्र से क्या होगा?
अत्यंत उग्र सुरक्षा और शत्रुओं का पूर्ण रूप से सिर काटना (आध्यात्मिक व ऊर्जा स्तर पर) 68
यह अस्त्र साधक के मार्ग में आने वाली किसी भी बाधा को प्रलयंकारी अग्नि से भस्म कर देता है
जाप विधि
भगवान शिव को इस मंत्र का ऋषि माना गया है 68। यह अस्त्र मंत्र है जिसका उपयोग विशेष तांत्रिक प्रयोगों (Prayogas) और युद्ध-कौशल में किया जाता है 68।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
हृषीकेश
bhakti mantraॐ रामाय नमः
kavach mantraनासां वैवस्वत: पातु मुखं मे भास्कर: सदा । नाभिं गृहपति: पातु मन्द: पातु कटिं तथा । पदौ मन्दगति: पातु सर्वांग पातु पिप्पल: । आंगो पांगानी सर्वानी रक्षे में सूर्य नंदन इत्तेत कवच देव पठे सूर्य सुतस्य यह नतस्य जायते पीडा प्रीतो भवति सूर्य जह व्यय जन्म द्वितीय मृत्यु स्थान गतो पिवा कलस्थो गतो वापी सुप्रीतु सदाशनी अष्टमस्थे सूर्यसुते व्यये जन्म द्वितीयगे। कवचं पठते नित्यं न पीडा जायते क्वचित्। इत्य तत कवचम दिव्यम सौरे निर्मित पुरा जन्म लग्न स्थिता दोषा सर्वान नाश्यते प्रभु इति शनि कवच संपूर्णं ॥ 20
sabar mantraभैरव शिव का चेला जहां जहां-जहां जाऊं नगर डगर लगे वहां फिर मेला शिव का धुना गोरख तापे काल कंटक थर थर कांपे मेरी रक्षा करें नवनाथ रामदूत हनुमंत रिद्धि सिद्धि आंगन विराजे माई अन्नपूर्णा सुखवंत शब्द सांचा पिंड काचा चलो मंत्र ईश्वर वाचा ओम गुरु जी गोरख जति मच्छिंद्र का चेला शिव के रूप में दिखे अलबेला कानों कुंडल गले में नादी हाथ त्रिशूल नाथ है आदि अलख पुरुष को करूं आदेश जन्म जन्म के काटो कलेश भगवा वेश हाथ में खप्पर भैरव शिव का चेला जहां जहां जाऊं नगर डगर लगे वहां फिर मेला शिव का धुना गोरख तापे काल कंटक थर थर कांपे मेरी रक्षा करें नवनाथ रामदूत हनुमंत रिद्धि सिद्धि आंगन विराजे माई अन्नपूर्णा सुखवंत शब्द सांचा पिंड कांचा चलो मंत्र ईश्वर वाचा 2
beej mantraजूं
dhyan mantraॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै। तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥