भगवान त्र्यम्बक (शिव का मृत्युंजय स्वरूप) ध्यान मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
मृत्युभय, रोग और मानसिक कष्टों का नाश, शारीरिक और मानसिक आरोग्य की पुनः स्थापना, और जीवन-मृत्यु के चक्र से मोक्ष (अमृत पद) की प्राप्ति।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
मृत्युभय, रोग और मानसिक कष्टों का नाश, शारीरिक और मानसिक आरोग्य की पुनः स्थापना, और जीवन-मृत्यु के चक्र से मोक्ष (अमृत पद) की प्राप्ति।
इस मंत्र से क्या होगा?
मृत्युभय, रोग और मानसिक कष्टों का नाश, शारीरिक और मानसिक आरोग्य की पुनः स्थापना, और जीवन-मृत्यु के चक्र से मोक्ष (अमृत पद) की प्राप्ति
जाप विधि
ब्रह्म मुहूर्त में स्वच्छ वातावरण में रुद्राक्ष की माला के साथ पूर्ण एकाग्रता से मानसिक अथवा उपांशु जप करें। शिव के तीन नेत्रों वाले और अमृत कलश धारण किए स्वरूप का स्मरण करें।
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