भगवान त्र्यम्बक (शिव का मृत्युंजय स्वरूप) ध्यान मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
मृत्युभय, रोग और मानसिक कष्टों का नाश, शारीरिक और मानसिक आरोग्य की पुनः स्थापना, और जीवन-मृत्यु के चक्र से मोक्ष (अमृत पद) की प्राप्ति।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
मृत्युभय, रोग और मानसिक कष्टों का नाश, शारीरिक और मानसिक आरोग्य की पुनः स्थापना, और जीवन-मृत्यु के चक्र से मोक्ष (अमृत पद) की प्राप्ति।
इस मंत्र से क्या होगा?
मृत्युभय, रोग और मानसिक कष्टों का नाश, शारीरिक और मानसिक आरोग्य की पुनः स्थापना, और जीवन-मृत्यु के चक्र से मोक्ष (अमृत पद) की प्राप्ति
जाप विधि
ब्रह्म मुहूर्त में स्वच्छ वातावरण में रुद्राक्ष की माला के साथ पूर्ण एकाग्रता से मानसिक अथवा उपांशु जप करें। शिव के तीन नेत्रों वाले और अमृत कलश धारण किए स्वरूप का स्मरण करें।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्माऽमृतं गमय ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
kavach mantraॐ यद्गुह्यं परमं लोके सर्वरक्षाकरं नृणाम्। यन्न कस्यचिदाख्यातं तन्मे ब्रूहि पितामह॥ अस्ति गुह्यतमं विप्र सर्वभूतोपकारकम्। देव्यास्तु कवचं पुण्यं तच्छृणुष्व महामुने॥ प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी। तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्॥ पञ्चमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च। सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्॥ नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः। उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना॥ शाकिनी तथा अंतरिक्षचरा घोरा डाकिन्यश्च महाबलाय प्रभु तपिश न धीर वृषभ वृषभ लो कुष्मांडा ब्रॉदर यह नश्यंति दर्शनात्तस्य कवचे 9
sabar mantraओम ह्रीम नजर उतरजा कुरु कुरु स्वाहा 26
tantrik mantraॐ धूम्र लोचनी उग्र रूपिनी सकल विष्छेदिनी सकल विष संचय नाशय नाशय मारय मारय विषमज्वर ताप ज्वर शीत ज्वर वात ज्वर लूत ज्वर पयत्य ज्वर श्लेष्म ज्वर मोह ज्वर संदीपात ज्वर प्रेत ज्वर पिशाच ज्वर कृत्रिम ज्वर सकल रोग निवारिणी सकल ग्रह छेदिनी धूं धूं धूं धूं धूं धूमावती माम रक्षा रक्ष शीघ्रम शीघ्रमाच्छा गच्छ क्षिप्रमेव आरोग्यम कुरु कुरु हुम फट धूम धूम धूमावती स्वाहा
ugra mantraओउम कालभैरवरूपाय त्रिनेत्राय महात्मने। प्रेतासनस्थितायैव खडगडमरूधारिणे।। जटाजूटधारी कराल वदनाय च। नमो नमः सदानंद भक्तवत्सल शम्भवे।। ओउम भं भैरवाय भीषणाय नखदंष्ट्राय विकर्तनाय। ताण्डवेशाय रक्तनेत्राय रक्षकाय शत्रुनाशकाय स्वाहा
naam mantraजातवेद