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उद्देश्य अनुसार मंत्र
भगवान कृष्ण (अष्टादशाक्षर गोपाल मंत्र)

भगवान कृष्ण (अष्टादशाक्षर गोपाल मंत्र) मूल मंत्र

क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजन वल्लभाय स्वाहा

भगवान के प्रति सर्वस्व एवं निःस्वार्थ समर्पण (स्वाहा के प्रभाव से), सांसारिक एवं आध्यात्मिक सुख-समृद्धि, एवं गोलोक वृंदावन की दिव्य प्रेमामृत (माधुर्य भाव) भक्ति की प्राप्ति 25।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारमूल मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

भगवान के प्रति सर्वस्व एवं निःस्वार्थ समर्पण (स्वाहा के प्रभाव से), सांसारिक एवं आध्यात्मिक सुख-समृद्धि, एवं गोलोक वृंदावन की दिव्य प्रेमामृत (माधुर्य भाव) भक्ति की प्राप्ति 25।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

भगवान के प्रति सर्वस्व एवं निःस्वार्थ समर्पण (स्वाहा के प्रभाव से), सांसारिक एवं आध्यात्मिक सुख-समृद्धि, एवं गोलोक वृंदावन की दिव्य प्रेमामृत (माधुर्य भाव) भक्ति की प्राप्ति

जाप विधि

किसी योग्य गुरु से प्राप्त कर (दीक्षा उपरांत), पूर्व दिशा की ओर मुख करके तुलसी की माला पर नित्य १०८ बार जप करें। इस मंत्र को षडंग (छः अंगों वाला) माना जाता है, जिसमें 'क्लीं' काम बीज है 25।

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