भगवान हनुमान (रुद्रात्मक मूल मंत्र) मूल मंत्र
ॐ नमो हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्
घोर शत्रुओं का शमन, असाध्य रोगों का निवारण, तंत्र-बाधा का विनाश एवं भूत-प्रेत आदि के भय से पूर्ण मुक्ति 43।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
घोर शत्रुओं का शमन, असाध्य रोगों का निवारण, तंत्र-बाधा का विनाश एवं भूत-प्रेत आदि के भय से पूर्ण मुक्ति 43।
इस मंत्र से क्या होगा?
घोर शत्रुओं का शमन, असाध्य रोगों का निवारण, तंत्र-बाधा का विनाश एवं भूत-प्रेत आदि के भय से पूर्ण मुक्ति
जाप विधि
पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए तथा आहार में सात्विकता (फलाहार/पयाहार) रखते हुए, हनुमान जी की प्रतिमा के समक्ष चमेली के तेल का दीपक जलाकर लाल चंदन की माला से जप करें 43।
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नासिकां पातु मे लक्ष्मीः कमला पातु लोचनम् ॥ ॐ श्रीं पद्मालयायै स्वाहा वक्षः सदावतु ॥ पातु श्रीर्मम कंकालं बाहुयुग्मं च ते नमः ॥ ओम ह्रीम श्रीम लक्ष्मी नमः चिरकाल तक मेरे पैरों का पालन करें ओम ह्रीम श्रीम नमः पद्माए स्वाहा नितम भाग की रक्षा करें ओम श्रीम महालक्ष्मी स्वाहा मेरे सर्वांग की सदा रक्षा करें ओम ह्रीम श्रीम क्लीम महालक्ष्मी स्वाहा आद्या शक्ति महालक्ष्मी भक्तानुग्रहकारिणी धारके पाठके चैव निश्चला निवसे ध्रुवं तंत्रोक्तम लक्ष्मी कवच संपूर्ण ओम 31
jap mantraॐ गण गणपतये नमः
beej mantraब्रिं
dhyan mantraमनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥
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shanti mantraॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः । सर्वे सन्तु निरामयाः । सर्वे भद्राणि पश्यन्तु । मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥