भगवान (कल्कि अवतार) नाम मंत्र
कल्कि
अधर्म का नाश, नवीन युग (सतयुग) की चेतना का जागरण एवं आसुरी शक्तियों से मुक्ति।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
अधर्म का नाश, नवीन युग (सतयुग) की चेतना का जागरण एवं आसुरी शक्तियों से मुक्ति।
इस मंत्र से क्या होगा?
अधर्म का नाश, नवीन युग (सतयुग) की चेतना का जागरण एवं आसुरी शक्तियों से मुक्ति
जाप विधि
कलयुग के दोषों और घोर निराशा के समय मानसिक स्मरण।
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ब्रीं
vaidik mantraॐ सुषारथिरश्वानिव यन्मनुष्यान्नेनीयतेऽभीशुभिर्वाजिन इव । हृत्प्रतिष्ठं यदजिरं जविष्ठं तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु ।।
sabar mantraक्रिम कामाख्या माई निज भैरव के संग आई देवे मनोवांछित सिद्धि पूरे सब कामना लेवे अडहुल का फूल सब स्त्री तोरा रूप मनसा पूरो माई तो शंकर की दुहाई क्रिंग क्रिंग क्रीम 18
dhyan mantraमनोबुद्ध्यहङ्कारचित्तानि नाहं न च श्रोत्रजिह्वे न च घ्राणनेत्रे। न च व्योम भूमिर्न तेजो न वायुश्चिदानन्दरूपः शिवोऽहं शिवोऽहम्॥
kavach mantraपातु श्रवणे वासरेश्वर घ्राणं धर्म पातु पदन वेदवाहन जीवा मानद पातु कंठ में सुरवंदित स्कंद प्रभाकर पातु वक्ष पातु जन प्रिय पातु पाद द्वादशात्मा सर्व सर्वांग सकलेश्वर यक्ष गन्धर्व राक्षसाः ब्रह्मराक्षस वेतालाः क्षमा दूरा देव पलायंते तस्य संकीर्तना अज्ञात कवच दिव्य यो जपे सूर्य मंत्रम् सिद्धि जायते तस्य कल्पकोटि शतैरपि। इति श्री ब्रह्मयामले त्रैलोक्य मंगलम नाम सूर्य कवचम संपूर्णम। 15
kaamya mantraइन्द्रं वयं महाधन इन्द्रमर्भे हवामहे। युजं वृत्रेषु वज्रिणम्॥