भगवान कृष्ण नाम मंत्र
गोविंद
इंद्रियों (मन और शरीर) पर पूर्ण नियंत्रण, भौतिक सुखों की प्राप्ति एवं दुर्घटनाओं से रक्षा।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
इंद्रियों (मन और शरीर) पर पूर्ण नियंत्रण, भौतिक सुखों की प्राप्ति एवं दुर्घटनाओं से रक्षा।
इस मंत्र से क्या होगा?
इंद्रियों (मन और शरीर) पर पूर्ण नियंत्रण, भौतिक सुखों की प्राप्ति एवं दुर्घटनाओं से रक्षा
जाप विधि
गौ-सेवा करते समय, अन्न ग्रहण करने से पूर्व या इंद्रियों के विचलन के समय स्मरण।
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ॐ ह्रीं श्रीं शर्वाय नमः
sabar mantraओम चौकी हनुमत वीर की बाण ध्वजा फहराए मारू मारू मारुत सुत मुष्टिक शत्रु नसाय मेरे इष्ट रामचंद्र जी अगुवा हनुमंता वीर चौकी सुदर्शन चक्र की रक्षा करें शरीर टोना ब्रह्म भूत प्रेत संग डाईन डाकिनी सांप बिच्छू चोर बट सब कुछ निष्फल जाई 6
vaidik mantraॐ वाङ् म आस्येऽस्तु। ॐ नसोर्मे प्राणोऽस्तु। ॐ अक्ष्णोर्मे चक्षुरस्तु। ॐ कर्णयोर्मे श्रोत्रमस्तु। ॐ बाह्वोर्मे बलमस्तु। ॐ ऊर्वोर्मे ओजोऽस्तु। ॐ अरिष्टानि मेऽङ्गानि तनूस्तन्वा मे सह सन्तु॥
tantrik mantraॐ स्वर्णाकर्षण भैरवं देवं सर्व शक्ति समन्वितम् सर्व अभीष्ट फलं देहि श्री क्षेत्रपाल नमोस्तुते
gyan mantraॐ अर्हं मुखकमलवासिनी पापात्मक्षयंकारी वद वद वाग्वादिनी सरस्वती ऐं ह्रीं नमः स्वाहा ॥
kavach mantraश्रीम क्लीम सरस्वती बुद्ध जन्य स्वाहा सततम मंत्र राजोयम दक्षिणे मां सदावतु ऐम ह्रीम श्रीम क्लीम त्र्यक्षरो मंत्रो नैऋत्यम सर्वदावतु ओम ऐकवासिन्य स्वाहा मां वारुणेवतु ओम सर्वांबिकाय स्वाहा वायव्यमा सदावतु ओम ऐम श्रीम क्लीम गद्यवासिन्य स्वाहा माम उत्तरेवतु ऐम सर्वशास्त्र वासिन्ये स्वाहान्य सदा ओम ह्रीम सर्व पूजिता स्वाहा चोरध्वं सदावतु ओम ह्रीम पुस्तक वासिन्य स्वाहा धोमांम सदावतु ओम ग्रंथ बीज स्वरूपाय स्वाहा मां सर्वतो वतु इति कथित विप्र ब्राह्म मंत्र विग्रहम इदम विश्व जयं नाम कवचम ब्रह्म रूपकम पंचलक्ष जपे नैव सिद्धमु कवचम भवे यदि सिद्ध कवचो बृहस्पति समो भवे महा वाग्मी कविंद्र त्रैलोक्य विजयी भवेत 27