श्री राधा नाम मंत्र
रासेश्वरी
कला, नृत्य और संगीत में निपुणता एवं अलौकिक महारास के दर्शन की योग्यता।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
कला, नृत्य और संगीत में निपुणता एवं अलौकिक महारास के दर्शन की योग्यता।
इस मंत्र से क्या होगा?
कला, नृत्य और संगीत में निपुणता एवं अलौकिक महारास के दर्शन की योग्यता
जाप विधि
पूर्णिमा की रात्रि में शांत भाव से मानसिक जप।
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ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः
ugra mantraॐ पक्षिराजाय विद्महे शरभेश्वराय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्
siddh mantraॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्र वैरोचनीये हूं हूं फट् स्वाहा ॥
shanti mantraॐ शं नो मित्रः शं वरुणः । शं नो भवत्वर्यमा । शं न इन्द्रो बृहस्पतिः । शं नो विष्णुरुरुक्रमः । नमो ब्रह्मणे । नमस्ते वायो । त्वमेव प्रत्यक्षं ब्रह्मासि । त्वामेव प्रत्यक्षं ब्रह्म वदिष्यामि । ऋतं वदिष्यामि । सत्यं वदिष्यामि । तन्मामवतु । तद्वक्तारमवतु । अवतु माम् । अवतु वक्तारम् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
tantrik mantraॐ ह्रीं क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहा
navgrah mantraॐ आप्यायस्व समेतु ते विश्वतः सोम वृष्णियम्। भवा वाजस्य संगथे।।