श्री राधा नाम मंत्र
राधे राधे
हृदय में माधुर्य रस का संचार, लौकिक चिंताओं का नाश एवं निरंतर आनंद की अवस्था।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
हृदय में माधुर्य रस का संचार, लौकिक चिंताओं का नाश एवं निरंतर आनंद की अवस्था।
इस मंत्र से क्या होगा?
हृदय में माधुर्य रस का संचार, लौकिक चिंताओं का नाश एवं निरंतर आनंद की अवस्था
जाप विधि
वृंदावन की रज (धूल) का ध्यान करते हुए सस्वर चलते-फिरते जप।
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ugra mantraअं ङं ञं णं नं मं
sabar mantraराम कुण्डली, ब्रह्मचाक । तेतीस कोटि देवा देवा अमुक की बेड़ियां । अमुकेर अंकेर बाण काटम्। शर काटम् । संधान काटम् । कुज्ञान काटम् । कारवणे काटे । राजा रामचन्द्रेर आज्ञा । राजा रामचन्द्ररे ऐई झण्डी अमुकेर अंगे शीघ्र लागूगे 25
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vaidik mantraॐ परोऽपेहि मनस्पाप किमशस्तानि शंससि । परेहि न त्वा कामये वृक्षान् वनानि सं चर गृहेषु गोषु मे मनः ॥