श्री राधा नाम मंत्र
राधे राधे
हृदय में माधुर्य रस का संचार, लौकिक चिंताओं का नाश एवं निरंतर आनंद की अवस्था।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
हृदय में माधुर्य रस का संचार, लौकिक चिंताओं का नाश एवं निरंतर आनंद की अवस्था।
इस मंत्र से क्या होगा?
हृदय में माधुर्य रस का संचार, लौकिक चिंताओं का नाश एवं निरंतर आनंद की अवस्था
जाप विधि
वृंदावन की रज (धूल) का ध्यान करते हुए सस्वर चलते-फिरते जप।
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ॐ धूम्र लोचनी उग्र रूपिनी सकल विष्छेदिनी सकल विष संचय नाशय नाशय मारय मारय विषमज्वर ताप ज्वर शीत ज्वर वात ज्वर लूत ज्वर पयत्य ज्वर श्लेष्म ज्वर मोह ज्वर संदीपात ज्वर प्रेत ज्वर पिशाच ज्वर कृत्रिम ज्वर सकल रोग निवारिणी सकल ग्रह छेदिनी धूं धूं धूं धूं धूं धूमावती माम रक्षा रक्ष शीघ्रम शीघ्रमाच्छा गच्छ क्षिप्रमेव आरोग्यम कुरु कुरु हुम फट धूम धूम धूमावती स्वाहा
sabar mantraओम नमो भूत प्रेत पिशाच दुष्ट दृष्टि विनाशाय ओम क्लीम स्वाहा 27
stotra mantraस्तुवन्ति ये स्तुतिभिरमीभिरन्वहं त्रयीमयीं त्रिभुवनमातरं रमाम् । गुणाधिका गुरुतरभाग्यभागिनो भवन्ति ते भुवि बुधभाविताशयाः ॥ 31
gyan mantraआ मां मेधा सुरभिर्विश्वरुपा हिरण्यवर्णा जगती जगम्या । ऊर्जस्वती पयसा पिन्वमाना सा मां मेधा सुप्रतीका जुषन्ताम् ॥
siddh mantraॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीयै नमः ॥
beej mantraह्रौं