भगवान कार्तिकेय (मुरुगन / स्कंद) बीज बीज मंत्र
ह्रीं हुं
असीम एकाग्रता का विकास, दृढ़ इच्छाशक्ति, साहस में अपार वृद्धि, आलस्य, भय और क्रोध पर पूर्ण विजय, तथा छात्रों और पेशेवरों के लिए जीवन के लक्ष्यों में शत-प्रतिशत सफलता 50। श्री राधा (ह्लादिनी शक्ति) वैष
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
असीम एकाग्रता का विकास, दृढ़ इच्छाशक्ति, साहस में अपार वृद्धि, आलस्य, भय और क्रोध पर पूर्ण विजय, तथा छात्रों और पेशेवरों के लिए जीवन के लक्ष्यों में शत-प्रतिशत सफलता 50। श्री राधा (ह्लादिनी शक्ति) वैष्णव तंत्र और विशेषकर 'राधा तंत्र' (Radha Tantra) के अनुसार, श्री राधा रानी भगवान श्रीकृष्ण की सर्वोच्च 'ह्लादिनी शक्ति' (Pleasure Potency) हैं 6। तांत्रिक साधनाओं में राधा के बीज मंत्रों को अत्यंत गोपनीय और शक्तिशाली माना गया है। ये मंत्र साधक के हृदय चक्र को शुद्ध कर विशुद्ध ईश्वरीय प्रेम और सांसारिक माया से मुक्ति दिलाते हैं 53।
इस मंत्र से क्या होगा?
असीम एकाग्रता का विकास, दृढ़ इच्छाशक्ति, साहस में अपार वृद्धि, आलस्य, भय और क्रोध पर पूर्ण विजय, तथा छात्रों और पेशेवरों के लिए जीवन के लक्ष्यों में शत-प्रतिशत सफलता 50
श्री राधा (ह्लादिनी शक्ति) वैष्णव तंत्र और विशेषकर 'राधा तंत्र' (Radha Tantra) के अनुसार, श्री राधा रानी भगवान श्रीकृष्ण की सर्वोच्च 'ह्लादिनी शक्ति' (Pleasure Potency) हैं 6
तांत्रिक साधनाओं में राधा के बीज मंत्रों को अत्यंत गोपनीय और शक्तिशाली माना गया है
ये मंत्र साधक के हृदय चक्र को शुद्ध कर विशुद्ध ईश्वरीय प्रेम और सांसारिक माया से मुक्ति दिलाते हैं
जाप विधि
6 मुखी रुद्राक्ष धारण करके या रुद्राक्ष माला से 108 बार नित्य जप करें 50।
विशेष टिप्पणियाँ
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ugra mantraॐ क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं भद्रकाल्यै क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा
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sabar mantraभैरव शिव का चेला जहां जहां-जहां जाऊं नगर डगर लगे वहां फिर मेला शिव का धुना गोरख तापे काल कंटक थर थर कांपे मेरी रक्षा करें नवनाथ रामदूत हनुमंत रिद्धि सिद्धि आंगन विराजे माई अन्नपूर्णा सुखवंत शब्द सांचा पिंड काचा चलो मंत्र ईश्वर वाचा ओम गुरु जी गोरख जति मच्छिंद्र का चेला शिव के रूप में दिखे अलबेला कानों कुंडल गले में नादी हाथ त्रिशूल नाथ है आदि अलख पुरुष को करूं आदेश जन्म जन्म के काटो कलेश भगवा वेश हाथ में खप्पर भैरव शिव का चेला जहां जहां जाऊं नगर डगर लगे वहां फिर मेला शिव का धुना गोरख तापे काल कंटक थर थर कांपे मेरी रक्षा करें नवनाथ रामदूत हनुमंत रिद्धि सिद्धि आंगन विराजे माई अन्नपूर्णा सुखवंत शब्द सांचा पिंड कांचा चलो मंत्र ईश्वर वाचा 2
gyan mantraयां मेधां देवगणाः पितरश्चोपासते । तया मामद्य मेधयाऽग्ने मेधाविनं कुरु स्वाहा ॥