एकादश रुद्र (अहिर्बुध्न्य रुद्र) मूल मंत्र
ॐ ह्रां ह्रीं हुं समस्त ग्रह दोष विनाशाय ॐ
नवग्रहों की पीड़ा, कुण्डली के समस्त ग्रह दोषों का निवारण एवं ग्रहीय बाधाओं के कारण उत्पन्न जीवन के संकटों से मुक्ति 7।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
नवग्रहों की पीड़ा, कुण्डली के समस्त ग्रह दोषों का निवारण एवं ग्रहीय बाधाओं के कारण उत्पन्न जीवन के संकटों से मुक्ति 7।
इस मंत्र से क्या होगा?
नवग्रहों की पीड़ा, कुण्डली के समस्त ग्रह दोषों का निवारण एवं ग्रहीय बाधाओं के कारण उत्पन्न जीवन के संकटों से मुक्ति
जाप विधि
सायं काल (प्रदोष वेला) में शिवलिंग पर जल व बिल्वपत्र अर्पित कर रुद्राक्ष की माला से १०८ बार जप करना विशेष फलदायी है 7।
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ॐ ह्रीं भैरवी कलौं ह्रीं स्वाहा ॥
kavach mantraश्रीम क्लीम सरस्वती बुद्ध जन्य स्वाहा सततम मंत्र राजोयम दक्षिणे मां सदावतु ऐम ह्रीम श्रीम क्लीम त्र्यक्षरो मंत्रो नैऋत्यम सर्वदावतु ओम ऐकवासिन्य स्वाहा मां वारुणेवतु ओम सर्वांबिकाय स्वाहा वायव्यमा सदावतु ओम ऐम श्रीम क्लीम गद्यवासिन्य स्वाहा माम उत्तरेवतु ऐम सर्वशास्त्र वासिन्ये स्वाहान्य सदा ओम ह्रीम सर्व पूजिता स्वाहा चोरध्वं सदावतु ओम ह्रीम पुस्तक वासिन्य स्वाहा धोमांम सदावतु ओम ग्रंथ बीज स्वरूपाय स्वाहा मां सर्वतो वतु इति कथित विप्र ब्राह्म मंत्र विग्रहम इदम विश्व जयं नाम कवचम ब्रह्म रूपकम पंचलक्ष जपे नैव सिद्धमु कवचम भवे यदि सिद्ध कवचो बृहस्पति समो भवे महा वाग्मी कविंद्र त्रैलोक्य विजयी भवेत 27
jap mantraॐ ह्रीं सरस्वत्यै नमः
beej mantraवं, शं, षं, सं
dhyan mantraॐ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मा अमृतं गमय। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
ugra mantraअं ङं ञं णं नं मं