उद्देश्य अनुसार मंत्र
एकादश रुद्र (अहिर्बुध्न्य रुद्र)
एकादश रुद्र (अहिर्बुध्न्य रुद्र) मूल मंत्र
ॐ ह्रां ह्रीं हुं समस्त ग्रह दोष विनाशाय ॐ
नवग्रहों की पीड़ा, कुण्डली के समस्त ग्रह दोषों का निवारण एवं ग्रहीय बाधाओं के कारण उत्पन्न जीवन के संकटों से मुक्ति 7।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारमूल मंत्र
प्रयोजन
यह मंत्र क्यों?
नवग्रहों की पीड़ा, कुण्डली के समस्त ग्रह दोषों का निवारण एवं ग्रहीय बाधाओं के कारण उत्पन्न जीवन के संकटों से मुक्ति 7।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
नवग्रहों की पीड़ा, कुण्डली के समस्त ग्रह दोषों का निवारण एवं ग्रहीय बाधाओं के कारण उत्पन्न जीवन के संकटों से मुक्ति
जाप विधि
सायं काल (प्रदोष वेला) में शिवलिंग पर जल व बिल्वपत्र अर्पित कर रुद्राक्ष की माला से १०८ बार जप करना विशेष फलदायी है 7।
विशेष टिप्पणियाँ
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