भगवान श्री राम भक्ति मंत्र
राम राम
सांसारिक मोह से वैराग्य, अस्तित्व संबंधी चिंताओं का नाश, और निर्गुण या सगुण राम के प्रति शुद्ध अद्वैत प्रेम की प्राप्ति 22। यह नाम भवसागर पार करने के लिए एक नौका के समान कार्य करता है जो साधक को परमान
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
सांसारिक मोह से वैराग्य, अस्तित्व संबंधी चिंताओं का नाश, और निर्गुण या सगुण राम के प्रति शुद्ध अद्वैत प्रेम की प्राप्ति 22। यह नाम भवसागर पार करने के लिए एक नौका के समान कार्य करता है जो साधक को परमानंद तक ले जाता है 1।
इस मंत्र से क्या होगा?
सांसारिक मोह से वैराग्य, अस्तित्व संबंधी चिंताओं का नाश, और निर्गुण या सगुण राम के प्रति शुद्ध अद्वैत प्रेम की प्राप्ति 22
यह नाम भवसागर पार करने के लिए एक नौका के समान कार्य करता है जो साधक को परमानंद तक ले जाता है
जाप विधि
संत कबीर, संत रविदास और महात्मा गांधी की नाम-जप परंपरा में केवल 'राम' नाम का निरंतर मानसिक या वाचिक जप किया जाता है 1। इसे किसी भी अवस्था में, यहाँ तक कि शौच आदि के समय भी मानसिक रूप से जपने की मान्यता है क्योंकि यह ध्वनि सीधे चेतना से जुड़ती है 4।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
बंधु समेत जबै अहिरावन, लै रघुनाथ पाताल सिधारो । देबिहिं पूजि भली बिधि सों बलि, देउ सबै मिति मंत्र बिचारो ॥ जाय सहाय भयो तब ही, अहिरावण सैन्य समेत सँहारो । को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥ 40
siddh mantraॐ गं गरिमायै नमः स्वाहा ।
naam mantraशुक्र
jap mantraॐ उलटत नरसिंह पलटत काया एहिले नरसिंह तोहे बुलाया जो मोर नाम करत सो मरत परत भैरव चक्कर में उल्टी वेद उसी को लागे कार दुहाई बड़े वीर नरसिंह की दुहाई कामरो कामाख्या देवी की दुहाई अष्टभुज देवी कालिका की दुहाई शिव सतगुरु के बंदे पायो
navgrah mantraॐ अग्निमूर्धा दिव: ककुत्पति: पृथिव्या अयम्। अपां रेतां सि जिन्वति।।
gyan mantraॐ नमो भगवते दक्षिणामूर्तये मह्यं मेधां प्रज्ञां प्रयच्छ स्वाहा ॥