अग्नि / आग्नेय काण्ड (१.१.२) वैदिक मंत्र
ॐ त्वमग्ने यज्ञानां होता विश्वेषां हितः । देवेभिर्मानुषे जने ॥
यज्ञ को लोक-कल्याणकारी बनाना एवं मनुष्य तथा अदृश्य देव-शक्तियों के मध्य निर्बाध सम्पर्क सूत्र स्थापित करना।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
यज्ञ को लोक-कल्याणकारी बनाना एवं मनुष्य तथा अदृश्य देव-शक्तियों के मध्य निर्बाध सम्पर्क सूत्र स्थापित करना।
इस मंत्र से क्या होगा?
यज्ञ को लोक-कल्याणकारी बनाना एवं मनुष्य तथा अदृश्य देव-शक्तियों के मध्य निर्बाध सम्पर्क सूत्र स्थापित करना
जाप विधि
यज्ञीय वेदी के प्रज्ज्वलन काल में घृत अथवा समिधा अर्पित करते समय साम-स्वर में उच्चारित गान।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
वं, शं, षं, सं
mool mantraॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः (सामान्य मूल: ॐ सूर्याय नमः)
kaamya mantraॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः।
bhakti mantraसर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते
siddh mantraत्वमस्मिन् कार्य निर्योगे प्रमाणं हरि सत्तम । हनुमान यत्नमास्थाय दुःख क्षय करो भव ॥
stotra mantraसनत्कुमारो वतु कामदेवाद्धयशीर्षा मां पथि देवहेलनात्। देवर्षिवर्यः पुरूषार्चनान्तरात् कूर्मो हरिर्मां निरयादशेषात्।। 7