प्राण / अंग-स्पर्श संध्या मंत्र (अथर्ववेदीय) वैदिक मंत्र
ॐ वाङ् म आस्येऽस्तु। ॐ नसोर्मे प्राणोऽस्तु। ॐ अक्ष्णोर्मे चक्षुरस्तु। ॐ कर्णयोर्मे श्रोत्रमस्तु। ॐ बाह्वोर्मे बलमस्तु। ॐ ऊर्वोर्मे ओजोऽस्तु। ॐ अरिष्टानि मेऽङ्गानि तनूस्तन्वा मे सह सन्तु॥
इन्द्रिय-संस्थानों में प्राण-शक्ति का संचार, रोग-प्रतिरोधक क्षमता का विकास एवं उपासना के लिए भौतिक शरीर की सक्षमता।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
इन्द्रिय-संस्थानों में प्राण-शक्ति का संचार, रोग-प्रतिरोधक क्षमता का विकास एवं उपासना के लिए भौतिक शरीर की सक्षमता।
इस मंत्र से क्या होगा?
इन्द्रिय-संस्थानों में प्राण-शक्ति का संचार, रोग-प्रतिरोधक क्षमता का विकास एवं उपासना के लिए भौतिक शरीर की सक्षमता
जाप विधि
संध्या वंदन के आरम्भ में दाहिने हाथ की उंगलियों में जल लेकर शरीर के विभिन्न अंगों (मुख, नासिका, नेत्र आदि) का स्पर्श करते हुए उच्चारण।
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