परमात्मा (वागाम्भृणी) / वाक् सूक्त (१०.१२५.१) वैदिक मंत्र
ॐ अहं रुद्रेभिर्वसुभिश्चरामि अहमादित्यैरुत विश्वदेवैः । अहं मित्रावरुणोभा बिभर्म्यहमिन्द्राग्नी अहमश्विनोभा ॥
आत्म-चेतना का जागरण, अद्वैत भाव की प्राप्ति, विश्वव्यापक सत्ता का बोध एवं आध्यात्मिक शक्ति।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
आत्म-चेतना का जागरण, अद्वैत भाव की प्राप्ति, विश्वव्यापक सत्ता का बोध एवं आध्यात्मिक शक्ति।
इस मंत्र से क्या होगा?
आत्म-चेतना का जागरण, अद्वैत भाव की प्राप्ति, विश्वव्यापक सत्ता का बोध एवं आध्यात्मिक शक्ति
जाप विधि
प्रातःकाल स्नानादि के पश्चात्, नवरात्र या विशेष देवी उपासना के समय पूर्व मुख होकर एकाग्रचित्त से सस्वर पाठ।
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ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः
bhakti mantraॐ श्री हनुमते नमः
gyan mantraमहो अर्णः सरस्वती प्रचेयति केतुना । धियो विश्वा विराजति ॥
naam mantraयशोदानंदन
jap mantraॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै। तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
tantrik mantraॐ धूम्र लोचनी उग्र रूपिनी सकल विष्छेदिनी सकल विष संचय नाशय नाशय मारय मारय विषमज्वर ताप ज्वर शीत ज्वर वात ज्वर लूत ज्वर पयत्य ज्वर श्लेष्म ज्वर मोह ज्वर संदीपात ज्वर प्रेत ज्वर पिशाच ज्वर कृत्रिम ज्वर सकल रोग निवारिणी सकल ग्रह छेदिनी धूं धूं धूं धूं धूं धूमावती माम रक्षा रक्ष शीघ्रम शीघ्रमाच्छा गच्छ क्षिप्रमेव आरोग्यम कुरु कुरु हुम फट धूम धूम धूमावती स्वाहा