परमात्मा (वागाम्भृणी) / वाक् सूक्त (१०.१२५.१) वैदिक मंत्र
ॐ अहं रुद्रेभिर्वसुभिश्चरामि अहमादित्यैरुत विश्वदेवैः । अहं मित्रावरुणोभा बिभर्म्यहमिन्द्राग्नी अहमश्विनोभा ॥
आत्म-चेतना का जागरण, अद्वैत भाव की प्राप्ति, विश्वव्यापक सत्ता का बोध एवं आध्यात्मिक शक्ति।
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यह मंत्र क्यों?
आत्म-चेतना का जागरण, अद्वैत भाव की प्राप्ति, विश्वव्यापक सत्ता का बोध एवं आध्यात्मिक शक्ति।
इस मंत्र से क्या होगा?
आत्म-चेतना का जागरण, अद्वैत भाव की प्राप्ति, विश्वव्यापक सत्ता का बोध एवं आध्यात्मिक शक्ति
जाप विधि
प्रातःकाल स्नानादि के पश्चात्, नवरात्र या विशेष देवी उपासना के समय पूर्व मुख होकर एकाग्रचित्त से सस्वर पाठ।
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ॐ ह्रीं मैं भीमाय नमः
beej mantraवं, शं, षं, सं
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