सोम (चंद्रमा / वनस्पति देवता) मूल मंत्र
ॐ सोमाय स्वाहा
शरीर में औषधियों का प्रभाव बढ़ाना, आंतरिक आनंद (Soma) का जागरण, अमृत तत्त्व (स्वास्थ्य व अमरता) की प्राप्ति एवं मानसिक शीतलता 57।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
शरीर में औषधियों का प्रभाव बढ़ाना, आंतरिक आनंद (Soma) का जागरण, अमृत तत्त्व (स्वास्थ्य व अमरता) की प्राप्ति एवं मानसिक शीतलता 57।
इस मंत्र से क्या होगा?
शरीर में औषधियों का प्रभाव बढ़ाना, आंतरिक आनंद (Soma) का जागरण, अमृत तत्त्व (स्वास्थ्य व अमरता) की प्राप्ति एवं मानसिक शीतलता
जाप विधि
सोमवार की रात्रि में चंद्रमा के दर्शन करते हुए स्फटिक की माला से १०८ बार जप करें। इस मंत्र को अमृत तत्त्व के आकर्षण हेतु प्रयुक्त किया जाता है 57।
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