एकादश रुद्र (पिंगल रुद्र) मूल मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं सर्व मङ्गलाय पिङ्गलाय ॐ नमः
जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सर्वमंगल की स्थापना, पारिवारिक सामंजस्य, सकारात्मक ऊर्जा का अटूट प्रवाह एवं लौकिक समृद्धि की प्राप्ति 7।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सर्वमंगल की स्थापना, पारिवारिक सामंजस्य, सकारात्मक ऊर्जा का अटूट प्रवाह एवं लौकिक समृद्धि की प्राप्ति 7।
इस मंत्र से क्या होगा?
जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सर्वमंगल की स्थापना, पारिवारिक सामंजस्य, सकारात्मक ऊर्जा का अटूट प्रवाह एवं लौकिक समृद्धि की प्राप्ति
जाप विधि
प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उत्तर दिशा की ओर मुख करके रुद्राक्ष की माला से न्यूनतम १०८ बार जप की विधि निर्धारित है 7।
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ऊरू रघूत्तमः पातु रक्षःकुलविनाशकृत्। जानुनी सेतुकृत् पातु जङ्घे दशमुखान्तकः। पादौ विभीषणश्रीदः पातु रामोऽखिलं वपुः। एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृती पठेत्। स चिरायुः सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत्। पातालभूतलव्योम- चारिणश्छद्मचारिणः। न द्रष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः। रामेति रामभद्रेति रामचन्द्रेति वा स्मरन्। नरो न लिप्यते पापैर्भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति। जगज्जैत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम्। यः कण्ठे धारयेत्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः। वज्रपञ्जरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत्। अव्याहताज्ञः सर्वत्र लभते जयमङ्गलम्। 34
gyan mantraॐ श्री हयग्रीवाय नमः ॥
tantrik mantraॐ ऐं ऐं महाभैरवि एहि एहि ईशानदिशायां बन्धय बन्धय ईशानमुखं स्तम्भय स्तम्भय ईशानशस्त्रं निवारय निवारय सर्वसैन्यं कीलय कीलय पच पच मथ मथ मर्दय मर्दय ॐ ह्लीं वश्यं कुरु करु ॐ ह्लां बगलामुखि हुं फट् स्वाहा
shanti mantraॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्माऽमृतं गमय ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
dhyan mantraॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै। तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
vaidik mantraॐ शान्ता द्यौः शान्ता पृथिवी शान्तमिदमुर्वन्तरिक्षम् । शान्ता उदन्वतीरापः शान्ता नः सन्त्वोषधयः ॥