गुरु / बृहस्पति मूल मंत्र
ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः (सामान्य मूल: ॐ गुरवे नमः)
बृहस्पति के अशुभ प्रभावों का शमन, उच्च शिक्षा, विवाह में आ रही बाधाओं का निवारण, यश तथा असीम सौभाग्य व आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति 47।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
बृहस्पति के अशुभ प्रभावों का शमन, उच्च शिक्षा, विवाह में आ रही बाधाओं का निवारण, यश तथा असीम सौभाग्य व आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति 47।
इस मंत्र से क्या होगा?
बृहस्पति के अशुभ प्रभावों का शमन, उच्च शिक्षा, विवाह में आ रही बाधाओं का निवारण, यश तथा असीम सौभाग्य व आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति
जाप विधि
गुरुवार को प्रातःकाल पीले वस्त्र पहनकर हल्दी या स्फटिक की माला से उत्तर दिशा की ओर मुख करके जप करें। अनुष्ठान हेतु ४० दिनों में १६,००० जप का विधान है 47।
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ugra mantraॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्र वैरोचनीये हूं हूं फट् स्वाहा
kavach mantraश्रीम क्लीम सरस्वती बुद्ध जन्य स्वाहा सततम मंत्र राजोयम दक्षिणे मां सदावतु ऐम ह्रीम श्रीम क्लीम त्र्यक्षरो मंत्रो नैऋत्यम सर्वदावतु ओम ऐकवासिन्य स्वाहा मां वारुणेवतु ओम सर्वांबिकाय स्वाहा वायव्यमा सदावतु ओम ऐम श्रीम क्लीम गद्यवासिन्य स्वाहा माम उत्तरेवतु ऐम सर्वशास्त्र वासिन्ये स्वाहान्य सदा ओम ह्रीम सर्व पूजिता स्वाहा चोरध्वं सदावतु ओम ह्रीम पुस्तक वासिन्य स्वाहा धोमांम सदावतु ओम ग्रंथ बीज स्वरूपाय स्वाहा मां सर्वतो वतु इति कथित विप्र ब्राह्म मंत्र विग्रहम इदम विश्व जयं नाम कवचम ब्रह्म रूपकम पंचलक्ष जपे नैव सिद्धमु कवचम भवे यदि सिद्ध कवचो बृहस्पति समो भवे महा वाग्मी कविंद्र त्रैलोक्य विजयी भवेत 27
beej mantraभ्रां
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