भगवान गणेश नाम मंत्र
एकदंत
लेखन कार्य में पूर्ण एकाग्रता, बुद्धि का तीक्ष्ण होना एवं लक्ष्य हेतु त्याग की भावना।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
लेखन कार्य में पूर्ण एकाग्रता, बुद्धि का तीक्ष्ण होना एवं लक्ष्य हेतु त्याग की भावना।
इस मंत्र से क्या होगा?
लेखन कार्य में पूर्ण एकाग्रता, बुद्धि का तीक्ष्ण होना एवं लक्ष्य हेतु त्याग की भावना
जाप विधि
लेखनी या कोई भी बौद्धिक अध्ययन शुरू करने से पूर्व स्मरण।
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ध्येयः सदा सवितृमण्डलमध्यवर्ती नारायणः सरसिजासनसन्निविष्टः। केयूरवान्मकरकुण्डलवान् किरीटी हारी हिरण्मयवपुर्धृतशङ्खचक्रः॥
kavach mantraॐ भूर्भुव: स्व: प्रांचामा पातु भूतेशः अग्ने पातु शंकर दक्षिणे पातुमा रुद्रो नैऋत्य स्थानु रेवच पश्चिमे खंड परशु वायव्या चंद्रशेखर उत्तरे गिरीशः पातु चैशान्य ईश्वर स्वयं उर्ध्वे मुंड सदा पातु चाध्य मृत्युंजय स्वयं जले स्थले चांदरीक्षे स्वप्ने जागरने सदा पिना कितुमा प्रीत्या भक्तम वैभक्त वत्सल य: सदा धारयेन्मर्त्य: शैवं कवचमुत्तमम् । न तस्य जायते क्वापि भयं शंभोरनुग्रहात् ॥ 30॥ इति अमोघ शिव कवच सम्पूर्ण ॥ 4
mool mantraॐ श्रीं ह्रीं सं सं ह्रीं श्रीं संकर्षणाय ॐ
siddh mantraॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं ह्सौः जगत्प्रसूत्यै नमः ॥
beej mantraश्रां
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