भगवान शिव नाम मंत्र
साम्ब सदाशिव
शिव-शक्ति की संयुक्त अहैतुकी कृपा, उत्तम गृहस्थ सुख एवं आंतरिक वैराग्य दोनों की प्राप्ति।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
शिव-शक्ति की संयुक्त अहैतुकी कृपा, उत्तम गृहस्थ सुख एवं आंतरिक वैराग्य दोनों की प्राप्ति।
इस मंत्र से क्या होगा?
शिव-शक्ति की संयुक्त अहैतुकी कृपा, उत्तम गृहस्थ सुख एवं आंतरिक वैराग्य दोनों की प्राप्ति
जाप विधि
रुद्राक्ष माला पर भावपूर्ण मानसिक जप, शिव और शक्ति के सम्मिलित रूप का ध्यान।
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ॐ भूर्भुव: स्व: प्रांचामा पातु भूतेशः अग्ने पातु शंकर दक्षिणे पातुमा रुद्रो नैऋत्य स्थानु रेवच पश्चिमे खंड परशु वायव्या चंद्रशेखर उत्तरे गिरीशः पातु चैशान्य ईश्वर स्वयं उर्ध्वे मुंड सदा पातु चाध्य मृत्युंजय स्वयं जले स्थले चांदरीक्षे स्वप्ने जागरने सदा पिना कितुमा प्रीत्या भक्तम वैभक्त वत्सल य: सदा धारयेन्मर्त्य: शैवं कवचमुत्तमम् । न तस्य जायते क्वापि भयं शंभोरनुग्रहात् ॥ 30॥ इति अमोघ शिव कवच सम्पूर्ण ॥ 4
jap mantraॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमः
beej mantraक्ष्रौं
dhyan mantraमनोबुद्ध्यहङ्कारचित्तानि नाहं न च श्रोत्रजिह्वे न च घ्राणनेत्रे। न च व्योम भूमिर्न तेजो न वायुश्चिदानन्दरूपः शिवोऽहं शिवोऽहम्॥
ugra mantraॐ लां लाकिन्यै नमः
shanti mantraॐ सह नाववतु । सह नौ भुनक्तु । सह वीर्यं करवावहै । तेजस्विनावधीतमस्तु मा विद्विषावहै ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥