भगवान शिव नाम मंत्र
गंगाधर
विचारों में पवित्रता, ज्ञान रूपी गंगा का प्रवाह एवं मस्तिष्क की शीतलता।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
विचारों में पवित्रता, ज्ञान रूपी गंगा का प्रवाह एवं मस्तिष्क की शीतलता।
इस मंत्र से क्या होगा?
विचारों में पवित्रता, ज्ञान रूपी गंगा का प्रवाह एवं मस्तिष्क की शीतलता
जाप विधि
स्नान करते समय जल को सिर पर धारण करते हुए स्मरण।
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क्रीं कालिकायै स्वाहा मम नाभिं सदावतु ॥ ह्रीं कालिकायै स्वाहा मम पृष्ठं सदावतु । रक्तबीजविनाशिन्यै स्वाहा हस्तौ सदावतु ॥ नीलुत्वल दलश्यामा शत्रु संघ विदारणी नरमुंड तथा खगम कमलम च वरम तथा निर्भयाम रक्त बदनाम दस्ताली घोर रूपणी शवासनताम काली मुंडमाला विभूषिताम सर्वाङ्गं पातु मे देवी सर्व संपत् करे शुभे सर्व देव स्तु ते देवी कालिके तवाम नमाम यहम 23
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siddh mantraॐ अघोरेभ्यः अथ घोरेभ्यो घोरघोरतरेभ्यश्च । सर्वतः शर्व सर्वेभ्यो नमस्ते रुद्ररूपेभ्यः ॥
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