माँ काली (महाकाली) बीज बीज मंत्र
क्लीं
असीमित आकर्षण शक्ति, आध्यात्मिक चुंबकत्व की प्राप्ति, अज्ञानता रूपी अंधकार का नाश और देवी के प्रति प्रगाढ़ भक्ति 16।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
असीमित आकर्षण शक्ति, आध्यात्मिक चुंबकत्व की प्राप्ति, अज्ञानता रूपी अंधकार का नाश और देवी के प्रति प्रगाढ़ भक्ति 16।
इस मंत्र से क्या होगा?
असीमित आकर्षण शक्ति, आध्यात्मिक चुंबकत्व की प्राप्ति, अज्ञानता रूपी अंधकार का नाश और देवी के प्रति प्रगाढ़ भक्ति
जाप विधि
शांत मन से 108 बार स्फटिक या रुद्राक्ष माला से जपें 16।
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नासां वैवस्वत: पातु मुखं मे भास्कर: सदा । नाभिं गृहपति: पातु मन्द: पातु कटिं तथा । पदौ मन्दगति: पातु सर्वांग पातु पिप्पल: । आंगो पांगानी सर्वानी रक्षे में सूर्य नंदन इत्तेत कवच देव पठे सूर्य सुतस्य यह नतस्य जायते पीडा प्रीतो भवति सूर्य जह व्यय जन्म द्वितीय मृत्यु स्थान गतो पिवा कलस्थो गतो वापी सुप्रीतु सदाशनी अष्टमस्थे सूर्यसुते व्यये जन्म द्वितीयगे। कवचं पठते नित्यं न पीडा जायते क्वचित्। इत्य तत कवचम दिव्यम सौरे निर्मित पुरा जन्म लग्न स्थिता दोषा सर्वान नाश्यते प्रभु इति शनि कवच संपूर्णं ॥ 20
siddh mantraॐ वाग्देव्यैच विद्महे ब्रह्म-पत्न्यैच धीमहि। तन्नो वाणी प्रचोदयात्॥
naam mantraशनिश्चर
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tantrik mantraॐ सहस्रार हुं फट्
bhakti mantraॐ नमः शिवाय