देवी महासरस्वती बीज बीज मंत्र
त्व्म्श्रीः
सर्वोच्च बौद्धिक और रचनात्मक संकायों (Creative Faculties) की असाधारण वृद्धि और ज्ञान के परम स्तर की प्राप्ति 16।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
सर्वोच्च बौद्धिक और रचनात्मक संकायों (Creative Faculties) की असाधारण वृद्धि और ज्ञान के परम स्तर की प्राप्ति 16।
इस मंत्र से क्या होगा?
सर्वोच्च बौद्धिक और रचनात्मक संकायों (Creative Faculties) की असाधारण वृद्धि और ज्ञान के परम स्तर की प्राप्ति
जाप विधि
एकाग्रता के साथ नित्य 108 बार 16।
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ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा
naam mantraबलराम
sabar mantraधन जैसे चुंबक खींचे लोह गोरख की आज्ञा टले नहीं मिटे साधक का मोह कीड़ा जागे पिंगला जागे सुष्मना का खुले द्वार जब तीनों नाड़ी जागे धन आवे बारंबार जैसे गंगा बहे अविरल जैसे सूरज देत उजास वैसे मेरे घर में लक्ष्मी करे सदा ही वास रुका धन चले बंद धन खुले आवे चहुं ओर से धन गोरख का शब्द सांचा रे सांचा रे गुरु का मन काल का भी काल है गोरख तीनों लोक बसेरा जो गोरख का नाम ले साधक उसका होए उजेरा उठ उठ लक्ष्मी आव बैठ मेरे द्वार गोरख की आज्ञा लेकर आव कर मेरा उद्धार शब्द सांचा पिंड कांचा सांची गुरु की बानी हुकुम गोरखनाथ का चले यही नाथ की निशानी 5
siddh mantraॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीयै नमः ॥
stotra mantraयस्य स्मरणमात्रेण जन्मसंसारबन्धनात् । विमुच्यते नमस्तस्मै विष्णवे प्रभविष्णवे ॥ 1
bhakti mantraजय श्री कृष्ण चैतन्य प्रभु नित्यानंद श्री अद्वैत गदाधर श्रीवासादि गौर भक्त वृन्द