वैदिक देवता (इंद्र) नाम मंत्र
इंद्र
नेतृत्व, सत्ता प्राप्ति, बारिश (जल-सुख) एवं भौतिक समृद्धि।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
नेतृत्व, सत्ता प्राप्ति, बारिश (जल-सुख) एवं भौतिक समृद्धि।
इस मंत्र से क्या होगा?
नेतृत्व, सत्ता प्राप्ति, बारिश (जल-सुख) एवं भौतिक समृद्धि
जाप विधि
वर्षा या प्राकृतिक सौंदर्य देखते समय मानसिक जप।
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ॐ स्वस्ति प्रजाभ्यः परिपालयन्तां न्यायेन मार्गेण महीं महीशाः । गोब्राह्मणेभ्यः शुभमस्तु नित्यं लोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
kavach mantraनासां वैवस्वत: पातु मुखं मे भास्कर: सदा । नाभिं गृहपति: पातु मन्द: पातु कटिं तथा । पदौ मन्दगति: पातु सर्वांग पातु पिप्पल: । आंगो पांगानी सर्वानी रक्षे में सूर्य नंदन इत्तेत कवच देव पठे सूर्य सुतस्य यह नतस्य जायते पीडा प्रीतो भवति सूर्य जह व्यय जन्म द्वितीय मृत्यु स्थान गतो पिवा कलस्थो गतो वापी सुप्रीतु सदाशनी अष्टमस्थे सूर्यसुते व्यये जन्म द्वितीयगे। कवचं पठते नित्यं न पीडा जायते क्वचित्। इत्य तत कवचम दिव्यम सौरे निर्मित पुरा जन्म लग्न स्थिता दोषा सर्वान नाश्यते प्रभु इति शनि कवच संपूर्णं ॥ 20
sabar mantraऊँ नमो आदेश गुरु गोरखनाथ की। शत्रु सवा लाख, एक मरे तो सब सिधाय 13
beej mantraदं
dhyan mantraगुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुर्गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुरेव परंब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः॥
gyan mantraअहं ब्रह्मास्मि