भगवान गणेश नाम मंत्र
गणपति
समस्त विघ्नों का समूल नाश एवं समूह का नेतृत्व (Leadership) करने की क्षमता में वृद्धि।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
समस्त विघ्नों का समूल नाश एवं समूह का नेतृत्व (Leadership) करने की क्षमता में वृद्धि।
इस मंत्र से क्या होगा?
समस्त विघ्नों का समूल नाश एवं समूह का नेतृत्व (Leadership) करने की क्षमता में वृद्धि
जाप विधि
किसी भी पूजा, यात्रा, अनुष्ठान या शुभ कार्य के आरंभ में वैखरी जप।
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ॐ ह्रीं योगिनि योगिनि योगेश्वरि योग भयङ्करि सकल स्थावर जङ्गमस्य मुख हृदयं मम वशं आकर्षय आकर्षय नमः।
mool mantraॐ वराहाय नमः
ugra mantraॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे श्मशान कालिकायै सर्व बाधा निवारणाय सर्व शत्रु संहारणाय मम रक्षां कुरु कुरु स्वाहा
sabar mantraकाल भैरव का जो नाम ले नर नारी उसके लिए मूठ कभी ना पड़े भारी जय जय काल भैरव देव मूठ चली हवा बनकर काल भैरव चले ढाल बनकर अष्ट हाथ भैरव जी के फैले काट दी जड़ मूठ की चढ़ा दी आकाश नीचे काटी ऊपर काटी काट दी पाताल में 11
shanti mantraॐ आप्यायन्तु ममाङ्गानि वाक्प्राणश्चक्षुः श्रोत्रमथो बलमिन्द्रियाणि च सर्वाणि । सर्वं ब्रह्मोपनिषदं माहं ब्रह्म निराकुर्यां मा मा ब्रह्म निराकरोदनिराकरणमस्त्वनिराकरणं मे अस्तु । तदात्मनि निरते य उपनिषत्सु धर्मास्ते मयि सन्तु ते मयि सन्तु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
tantrik mantraऐं क्लीं सौः