भगवान कृष्ण नाम मंत्र
कृष्ण
जन्म-जन्मांतर के अज्ञान का नाश, आत्मसाक्षात्कार एवं सर्वोच्च कृष्ण-प्रेम की प्राप्ति।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
जन्म-जन्मांतर के अज्ञान का नाश, आत्मसाक्षात्कार एवं सर्वोच्च कृष्ण-प्रेम की प्राप्ति।
इस मंत्र से क्या होगा?
जन्म-जन्मांतर के अज्ञान का नाश, आत्मसाक्षात्कार एवं सर्वोच्च कृष्ण-प्रेम की प्राप्ति
जाप विधि
हृदय चक्र पर भगवान के श्याम वर्ण का ध्यान करते हुए निरंतर मानसिक जप (अजपा)।
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ॐ मं महिमायै नमः स्वाहा ।
mool mantraॐ गं ग्लौं श्रौं ग्लौं गं ॐ नमः
jap mantraॐ नमो नृसिंहाय हिरण्यकश्यप-वक्ष-स्थल-विदारणाय त्रिभुवनव्यापकाय भूत, प्रेत, पिशाच, डाकिनी कुलोन्मूल नाशाय स्तम्भोद्भवाय समस्तदोषान् हर-हर विसर-विसर पच-पच-हन-हन-कम्पय-कम्पय मथ-मथ ह्रीं ह्रीं फट् फट् एह्येहि रुद्र आज्ञापयति स्वाहा
gyan mantraवद वद वाग्वादिनी स्वाहा ॥
kaamya mantraॐ पार्वती वल्लभाय नमः।
kavach mantraॐ भूर्भुव: स्व: प्रांचामा पातु भूतेशः अग्ने पातु शंकर दक्षिणे पातुमा रुद्रो नैऋत्य स्थानु रेवच पश्चिमे खंड परशु वायव्या चंद्रशेखर उत्तरे गिरीशः पातु चैशान्य ईश्वर स्वयं उर्ध्वे मुंड सदा पातु चाध्य मृत्युंजय स्वयं जले स्थले चांदरीक्षे स्वप्ने जागरने सदा पिना कितुमा प्रीत्या भक्तम वैभक्त वत्सल य: सदा धारयेन्मर्त्य: शैवं कवचमुत्तमम् । न तस्य जायते क्वापि भयं शंभोरनुग्रहात् ॥ 30॥ इति अमोघ शिव कवच सम्पूर्ण ॥ 4