ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
माँ सरस्वती

माँ सरस्वती नाम मंत्र

शारदा

विद्या, साहित्य और शास्त्र-ज्ञान की सहज एवं शीघ्र प्राप्ति।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारनाम मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

विद्या, साहित्य और शास्त्र-ज्ञान की सहज एवं शीघ्र प्राप्ति।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

विद्या, साहित्य और शास्त्र-ज्ञान की सहज एवं शीघ्र प्राप्ति

जाप विधि

अध्ययन (पढ़ाई) से पूर्व मानसिक या वैखरी उच्चारण।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

siddh mantra

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीयै नमः ॥

ugra mantra

ॐ नमो विपरीत-प्रत्यंगिरायै सहस्त्रानेक-कार्य-लोचनायै कोटि-विद्युज्जिह्वायै महा-व्याव्यापिन्यै संहार-रुपायै जन्म-शान्ति-कारिण्यै। मम स-परिवारकस्य भावि-भूत-भवच्छत्रून् स-दाराऽपत्यान् संहारय संहारय, महा-प्रभावं दर्शय दर्शय, हिलि हिलि, किलि किलि, मिलि मिलि, चिलि चिलि, भूरि भूरि, विद्युज्जिह्वे, ज्वल ज्वल, प्रज्वल प्रज्वल, ध्वंसय ध्वंसय, प्रध्वंसय प्रध्वंसय, ग्रासय ग्रासय, पिब पिब, नाशय नाशय, त्रासय त्रासय, वित्रासय वित्रासय, मारय मारय, विमारय विमारय, भ्रामय भ्रामय, विभ्रामय विभ्रामय, द्रावय द्रावय, विद्रावय विद्रावय हूं हूं फट् स्वाहा।।

beej mantra

स्रीं

stotra mantra

महालक्ष्म्यष्टक स्तोत्रं यः पठेद्भक्तिमान्नरः । सर्वसिद्धिमवाप्नोति राज्यं प्राप्नोतिसर्वदा ॥ एककाले पठेन्नित्यं महापापविनाशनम् । द्विकालंयःपठेन्नित्यं धनधान्यसमन्वितः ॥ त्रिकालं यःपठेन्नित्यं महाशत्रुविनाशनम् । महालक्ष्मीर्भवेन्नित्यंप्रसन्न वरदा शुभा ॥ 29

kavach mantra

नासिकां पातु मे लक्ष्मीः कमला पातु लोचनम् ॥ ॐ श्रीं पद्मालयायै स्वाहा वक्षः सदावतु ॥ पातु श्रीर्मम कंकालं बाहुयुग्मं च ते नमः ॥ ओम ह्रीम श्रीम लक्ष्मी नमः चिरकाल तक मेरे पैरों का पालन करें ओम ह्रीम श्रीम नमः पद्माए स्वाहा नितम भाग की रक्षा करें ओम श्रीम महालक्ष्मी स्वाहा मेरे सर्वांग की सदा रक्षा करें ओम ह्रीम श्रीम क्लीम महालक्ष्मी स्वाहा आद्या शक्ति महालक्ष्मी भक्तानुग्रहकारिणी धारके पाठके चैव निश्चला निवसे ध्रुवं तंत्रोक्तम लक्ष्मी कवच संपूर्ण ओम 31

mool mantra

ॐ क्रीं क्रीं क्रीं हूँ हूँ ह्रीं ह्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूँ हूँ ह्रीं ह्रीं स्वाहा