माँ त्रिपुरसुंदरी (षोडशी / ललिता) एवं भुवनेश्वरी बीज बीज मंत्र
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यह 'माया बीज' या 'शक्ति बीज' है जो सौर ऊर्जा (Solar energy) का संचार करता है। इसका उपयोग असीमित सुंदरता, परम आकर्षण, तीन लोकों की संपदा, किसी भी क्षेत्र में अग्रणी (Leader) बनने की क्षमता, और भौतिक प्
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
यह 'माया बीज' या 'शक्ति बीज' है जो सौर ऊर्जा (Solar energy) का संचार करता है। इसका उपयोग असीमित सुंदरता, परम आकर्षण, तीन लोकों की संपदा, किसी भी क्षेत्र में अग्रणी (Leader) बनने की क्षमता, और भौतिक प्रचुरता के साथ आध्यात्मिक मुक्ति (मोक्ष) के लिए होता है 5।
इस मंत्र से क्या होगा?
यह 'माया बीज' या 'शक्ति बीज' है जो सौर ऊर्जा (Solar energy) का संचार करता है
इसका उपयोग असीमित सुंदरता, परम आकर्षण, तीन लोकों की संपदा, किसी भी क्षेत्र में अग्रणी (Leader) बनने की क्षमता, और भौतिक प्रचुरता के साथ आध्यात्मिक मुक्ति (मोक्ष) के लिए होता है
जाप विधि
सात्विक भोजन ग्रहण करते हुए, माघ पूर्णिमा या किसी भी पूर्णिमा से प्रारंभ कर नित्य 108 बार जपें। शिव और भैरव पूजन के पश्चात जप अति उत्तम है 14।
विशेष टिप्पणियाँ
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मनोबुद्ध्यहङ्कारचित्तानि नाहं न च श्रोत्रजिह्वे न च घ्राणनेत्रे। न च व्योम भूमिर्न तेजो न वायुश्चिदानन्दरूपः शिवोऽहं शिवोऽहम्॥
naam mantraत्र्यम्बक
vaidik mantraॐ येन कर्मण्यपसो मनीषिणो यज्ञे कृण्वन्ति विदथेषु धीराः । यदपूर्वं यक्षमन्तः प्रजानां तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु ।।
kaamya mantraयस्याः प्रभावमतुलं भगवाननन्तो ब्रह्मा हरश्च न हि वक्तुमलं बलं च। सा चण्डिकाखिलजगत्परिपालनाय नाशाय चाशुभभयस्य मतिं करोतु॥
shanti mantraॐ सह नाववतु । सह नौ भुनक्तु । सह वीर्यं करवावहै । तेजस्विनावधीतमस्तु मा विद्विषावहै ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
jap mantraॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि तन्नो हनुमान् प्रचोदयात्