भगवान विष्णु नाम मंत्र
श्री हरि
सभी प्रकार के लौकिक एवं अलौकिक कष्टों का शमन एवं सर्वमंगल की प्राप्ति।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
सभी प्रकार के लौकिक एवं अलौकिक कष्टों का शमन एवं सर्वमंगल की प्राप्ति।
इस मंत्र से क्या होगा?
सभी प्रकार के लौकिक एवं अलौकिक कष्टों का शमन एवं सर्वमंगल की प्राप्ति
जाप विधि
रुद्राक्ष या तुलसी माला पर दिन में ३ बार (त्रिकाल) वैखरी या उपांशु जप।
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ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमः
kavach mantraसकलायुध सम्पूर्ण निखिलाङ्ग सुदर्शन यदम कवच दिव्यम परमानंद दायिनं सौदर्शन यो सदा शुद्ध पठे नरह तस्या सिद्धि विपुला करस्था भवति ध्रुवं कोष्माण्ड चण्ड भूता ये दुष्टा ग्रहा स्मृता पलायन्ते निशंभीता वर्मनोस्य प्रभावतः कुष्ठा पस्मा गुलमा व्याध कर्म हेतुका नश्य तन मंत्रिता भूपाना सप्त दिनावधी अनेन मन्त्रिता मृतानां तुलसी मूल संस्थितां ललाटे तिलकं कृत्वा मोहये त्रिजगन्नरः। 17
gyan mantraसदसस्पतिमद्भुतं प्रियमिन्द्रस्य काम्यम् । सनिं मेधामयासिषं स्वाहा ॥
tantrik mantraॐ काल कालाय विद्महे कालातीताय धीमहि तन्नो भैरव प्रचोदयात्
dhyan mantraध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचंद्रावतंसं रत्नाकल्पोज्ज्वलांगं परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्। पद्मासीनं समंतात्स्थितममरगणैर्व्याघ्रकृत्तिं वसानं विश्वाद्यं विश्वबीजं निखिलभयहरं पंचवक्त्रं त्रिनेत्रम्॥
navgrah mantraॐ आप्यायस्व समेतु ते विश्वतः सोम वृष्णियम्। भवा वाजस्य संगथे।।