भगवान कृष्ण नाम मंत्र
वासुदेव
सर्वत्र ईश्वर के दर्शन की योग्यता, भय-शोक की निवृत्ति एवं समभाव (समान दृष्टि) की प्राप्ति।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
सर्वत्र ईश्वर के दर्शन की योग्यता, भय-शोक की निवृत्ति एवं समभाव (समान दृष्टि) की प्राप्ति।
इस मंत्र से क्या होगा?
सर्वत्र ईश्वर के दर्शन की योग्यता, भय-शोक की निवृत्ति एवं समभाव (समान दृष्टि) की प्राप्ति
जाप विधि
ईश्वर की सर्वव्यापकता (कण-कण में व्याप्ति) का ध्यान करते हुए मानसिक जप।
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ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पुर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
kavach mantraॐ भूर्भुव: स्व: प्रांचामा पातु भूतेशः अग्ने पातु शंकर दक्षिणे पातुमा रुद्रो नैऋत्य स्थानु रेवच पश्चिमे खंड परशु वायव्या चंद्रशेखर उत्तरे गिरीशः पातु चैशान्य ईश्वर स्वयं उर्ध्वे मुंड सदा पातु चाध्य मृत्युंजय स्वयं जले स्थले चांदरीक्षे स्वप्ने जागरने सदा पिना कितुमा प्रीत्या भक्तम वैभक्त वत्सल य: सदा धारयेन्मर्त्य: शैवं कवचमुत्तमम् । न तस्य जायते क्वापि भयं शंभोरनुग्रहात् ॥ 30॥ इति अमोघ शिव कवच सम्पूर्ण ॥ 4
sabar mantraभैरव शिव का चेला जहां जहां-जहां जाऊं नगर डगर लगे वहां फिर मेला शिव का धुना गोरख तापे काल कंटक थर थर कांपे मेरी रक्षा करें नवनाथ रामदूत हनुमंत रिद्धि सिद्धि आंगन विराजे माई अन्नपूर्णा सुखवंत शब्द सांचा पिंड काचा चलो मंत्र ईश्वर वाचा ओम गुरु जी गोरख जति मच्छिंद्र का चेला शिव के रूप में दिखे अलबेला कानों कुंडल गले में नादी हाथ त्रिशूल नाथ है आदि अलख पुरुष को करूं आदेश जन्म जन्म के काटो कलेश भगवा वेश हाथ में खप्पर भैरव शिव का चेला जहां जहां जाऊं नगर डगर लगे वहां फिर मेला शिव का धुना गोरख तापे काल कंटक थर थर कांपे मेरी रक्षा करें नवनाथ रामदूत हनुमंत रिद्धि सिद्धि आंगन विराजे माई अन्नपूर्णा सुखवंत शब्द सांचा पिंड कांचा चलो मंत्र ईश्वर वाचा 2
tantrik mantraॐ ह्रीं क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहा
ugra mantraॐ भम भैरवाय कम कम दुर्जन विनाशाय शत्रु नाशाय फट स्वाहा
siddh mantraॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः