ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
श्री हनुमान / संकटमोचन हनुमानाष्टक

श्री हनुमान / संकटमोचन हनुमानाष्टक स्तोत्र मंत्र

को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥ 40

घोर संकटों से मुक्ति, अभीष्ट इच्छाओं की पूर्ति और समस्त नकारात्मक परिस्थितियों से बचाव 39।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारस्तोत्र मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

घोर संकटों से मुक्ति, अभीष्ट इच्छाओं की पूर्ति और समस्त नकारात्मक परिस्थितियों से बचाव 39।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

घोर संकटों से मुक्ति, अभीष्ट इच्छाओं की पूर्ति और समस्त नकारात्मक परिस्थितियों से बचाव

जाप विधि

संकल्प लेकर 41 दिन तक प्रतिदिन 108 पाठ करें और 41वें दिन दशांश हवन करें। मंगलवार का दिन विशेष फलदायी है 39।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

ugra mantra

ॐ ह्रीं श्रीं उग्र तारे तुतारे देवदत्त फट्

beej mantra

ग्रीं

kavach mantra

ॐ भूर्भुव: स्व: प्रांचामा पातु भूतेशः अग्ने पातु शंकर दक्षिणे पातुमा रुद्रो नैऋत्य स्थानु रेवच पश्चिमे खंड परशु वायव्या चंद्रशेखर उत्तरे गिरीशः पातु चैशान्य ईश्वर स्वयं उर्ध्वे मुंड सदा पातु चाध्य मृत्युंजय स्वयं जले स्थले चांदरीक्षे स्वप्ने जागरने सदा पिना कितुमा प्रीत्या भक्तम वैभक्त वत्सल य: सदा धारयेन्मर्त्य: शैवं कवचमुत्तमम् । न तस्य जायते क्वापि भयं शंभोरनुग्रहात् ॥ 30॥ इति अमोघ शिव कवच सम्पूर्ण ॥ 4

shanti mantra

ॐ शं नो मित्रः शं वरुणः । शं नो भवत्वर्यमा । शं न इन्द्रो बृहस्पतिः । शं नो विष्णुरुरुक्रमः । नमो ब्रह्मणे । नमस्ते वायो । त्वमेव प्रत्यक्षं ब्रह्मासि । त्वामेव प्रत्यक्षं ब्रह्म वदिष्यामि । ऋतं वदिष्यामि । सत्यं वदिष्यामि । तन्मामवतु । तद्वक्तारमवतु । अवतु माम् । अवतु वक्तारम् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

siddh mantra

ॐ गं गरिमायै नमः स्वाहा ।

navgrah mantra

नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। छायामार्तंड सम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥