माँ धूमावती बीज बीज मंत्र
धूं
घोर दरिद्रता, दुर्भाग्य और अभाव का शमन, तथा सांसारिक भ्रम और भौतिक कठिनाइयों से स्थायी वैराग्य (Detachment) और मुक्ति 36। भगवान गणेश, भगवान हनुमान और भगवान कार्तिकेय सनातन धर्म में किसी भी साधना या का
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
घोर दरिद्रता, दुर्भाग्य और अभाव का शमन, तथा सांसारिक भ्रम और भौतिक कठिनाइयों से स्थायी वैराग्य (Detachment) और मुक्ति 36। भगवान गणेश, भगवान हनुमान और भगवान कार्तिकेय सनातन धर्म में किसी भी साधना या कार्य के निर्विघ्न आरंभ हेतु गणेश के बीज मंत्रों का विधान है 47। हनुमान और कार्तिकेय के बीज मंत्र असीमित शारीरिक बल, अजेय साहस, मंगलकारी ऊर्जा और प्रेत-बाधाओं से अचूक रक्षा के अस्त्र माने गए हैं 26।
इस मंत्र से क्या होगा?
घोर दरिद्रता, दुर्भाग्य और अभाव का शमन, तथा सांसारिक भ्रम और भौतिक कठिनाइयों से स्थायी वैराग्य (Detachment) और मुक्ति 36
भगवान गणेश, भगवान हनुमान और भगवान कार्तिकेय सनातन धर्म में किसी भी साधना या कार्य के निर्विघ्न आरंभ हेतु गणेश के बीज मंत्रों का विधान है 47
हनुमान और कार्तिकेय के बीज मंत्र असीमित शारीरिक बल, अजेय साहस, मंगलकारी ऊर्जा और प्रेत-बाधाओं से अचूक रक्षा के अस्त्र माने गए हैं
जाप विधि
एकांत स्थान में नित्य 108 बार जप 29।
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ॐ आप्यायन्तु ममाङ्गानि वाक्प्राणश्चक्षुः श्रोत्रमथो बलमिन्द्रियाणि च सर्वाणि । सर्वं ब्रह्मोपनिषदं माहं ब्रह्म निराकुर्यां मा मा ब्रह्म निराकरोदनिराकरणमस्त्वनिराकरणं मे अस्तु । तदात्मनि निरते य उपनिषत्सु धर्मास्ते मयि सन्तु ते मयि सन्तु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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sabar mantraओम गुरु जी शिव बैठे कैलाश विष्णु बैठे बैकुंठ मेरी भक्ति शिव की शक्ति पूजू अमुक देव मनाऊं तो आवे ना आवे तो दुहाई शिव शंकर की दुहाई माता काली की दुहाई गुरु गोरखनाथ की 1
tantrik mantraॐ क्षं कृष्ण वाससे, सिंह वदने, महा वदने, महा भैरवि, सर्व शत्रु कर्म विध्वंसिनि, परमंत्र छेदिनि, सर्व भूत दमनि, सर्व भूतां बंध बंध, सर्व विघ्नान् छिन्दि छिन्दि, सर्व व्याधिं निकृंत निकृंत, सर्व दुष्टान् पक्ष पक्ष, ज्वाल जिव्हे, कराल वक्त्रे, कराल दंष्ट्रे, प्रत्यंगिरे ह्रीं स्वाहा
ugra mantraॐ धूं धूं धूं धूमावती माम रक्ष रक्ष शीघ्रम शीघ्रमाच्छा गच्छ क्षिप्रमेव आरोग्यम कुरु कुरु हुम फट धूम धूम धूमावती स्वाहा
naam mantraमार्तंड