ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
परब्रह्म (शांति और विद्या स्वरूप)

परब्रह्म (शांति और विद्या स्वरूप) ध्यान मंत्र

ॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै। तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

मन में स्थिरता लाना, अंतर्विरोधों को समाप्त कर सामंजस्य स्थापित करना, और आधिभौतिक, आधिदैविक तथा आध्यात्मिक बाधाओं को शांत करना।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारध्यान मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

मन में स्थिरता लाना, अंतर्विरोधों को समाप्त कर सामंजस्य स्थापित करना, और आधिभौतिक, आधिदैविक तथा आध्यात्मिक बाधाओं को शांत करना।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

मन में स्थिरता लाना, अंतर्विरोधों को समाप्त कर सामंजस्य स्थापित करना, और आधिभौतिक, आधिदैविक तथा आध्यात्मिक बाधाओं को शांत करना

जाप विधि

ध्यान या अभ्यास से पहले इस श्लोक का तीन बार 'शांति' शब्द के उच्चारण के साथ पाठ करें। यह भाव रखें कि दैवीय ऊर्जा रक्षा कर रही है। ध्वनि के कंपन को नाभि से सिर तक महसूस करें।

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