परब्रह्म (शांति और विद्या स्वरूप) ध्यान मंत्र
ॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै। तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
मन में स्थिरता लाना, अंतर्विरोधों को समाप्त कर सामंजस्य स्थापित करना, और आधिभौतिक, आधिदैविक तथा आध्यात्मिक बाधाओं को शांत करना।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
मन में स्थिरता लाना, अंतर्विरोधों को समाप्त कर सामंजस्य स्थापित करना, और आधिभौतिक, आधिदैविक तथा आध्यात्मिक बाधाओं को शांत करना।
इस मंत्र से क्या होगा?
मन में स्थिरता लाना, अंतर्विरोधों को समाप्त कर सामंजस्य स्थापित करना, और आधिभौतिक, आधिदैविक तथा आध्यात्मिक बाधाओं को शांत करना
जाप विधि
ध्यान या अभ्यास से पहले इस श्लोक का तीन बार 'शांति' शब्द के उच्चारण के साथ पाठ करें। यह भाव रखें कि दैवीय ऊर्जा रक्षा कर रही है। ध्वनि के कंपन को नाभि से सिर तक महसूस करें।
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ॐ बं बटुकाय नमः
kavach mantraस्कन्धौ पातु गजस्कन्धः स्तनौ विघ्नविनाशनः । हृदयं गणनाथस्तु हेरम्बो जठरं महान् ॥ धराधरः पातु पार्श्वौ पृष्ठं विघ्नहरः शुभः । लिङ्गं गुह्यं सदा पातु वक्रतुण्डो महाबलः ॥ गणक्रीडो जानुजङ्घे ऊरू मङ्गलमूर्तिमान् । एकदन्तो महाबुद्धिः पादौ गुल्फौ सदाऽवतु ॥ क्षिप्रप्रसादनो बाहू पाणी आशाप्रपूरकः । अङ्गुलीश्च नखान्पातु पद्महस्तोऽरिनाशनः ॥ सर्वाङ्गानि मयूरेशो विश्वव्यापी सदाऽवतु । अनुक्तमपि यत्स्थानं धूम्रकेतुः सदाऽवतु ॥ आमोदस्त्वग्रतः पातु प्रमोदः पृष्ठतोऽवतु । प्राच्यां रक्षतु बुद्धीश आग्नेय्यां सिद्धिदायकः ॥ दक्षिणस्यामुमापुत्रो नैऋत्यां तु गणेश्वरः । प्रतीच्यां विघ्नहर्ताऽव्याद्वायव्यां गजकर्णकः ॥ कौबेर्यां निधिपः पायादीशान्यामीशनन्दनः । दिवाऽव्यादेकदन्तस्तु रात्रौ सन्ध्यासु विघ्नहृत् ॥ 14
naam mantraहरिप्रिया
navgrah mantraॐ आ कृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यं च। हिरण्ययेन सविता रथेना देवो याति भुवनानि पश्यन्।।
vaidik mantraॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्षं शान्ति: पृथिवी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति: । वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति: सर्वं शान्ति: शान्तिरेव शान्ति: सा मा शान्तिरेधि ॥ ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति: ॥
bhakti mantraरामचन्द्रचरणौ शरणं प्रपद्ये