भगवान कृष्ण नाम मंत्र
दामोदर
कुमार्ग से बचाव, संयम, अहैतुकी भक्ति की प्राप्ति एवं उदर रोगों से मुक्ति।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
कुमार्ग से बचाव, संयम, अहैतुकी भक्ति की प्राप्ति एवं उदर रोगों से मुक्ति।
इस मंत्र से क्या होगा?
कुमार्ग से बचाव, संयम, अहैतुकी भक्ति की प्राप्ति एवं उदर रोगों से मुक्ति
जाप विधि
कार्तिक मास में दीपदान करते हुए या उदर (पेट) पर ध्यान करते हुए स्मरण।
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ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट् ॥
beej mantraहुं
jap mantraॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः
dhyan mantraशान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिहृद्ध्यानगम्यं वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥
navgrah mantraॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः॥
kavach mantraनासां वैवस्वत: पातु मुखं मे भास्कर: सदा । नाभिं गृहपति: पातु मन्द: पातु कटिं तथा । पदौ मन्दगति: पातु सर्वांग पातु पिप्पल: । आंगो पांगानी सर्वानी रक्षे में सूर्य नंदन इत्तेत कवच देव पठे सूर्य सुतस्य यह नतस्य जायते पीडा प्रीतो भवति सूर्य जह व्यय जन्म द्वितीय मृत्यु स्थान गतो पिवा कलस्थो गतो वापी सुप्रीतु सदाशनी अष्टमस्थे सूर्यसुते व्यये जन्म द्वितीयगे। कवचं पठते नित्यं न पीडा जायते क्वचित्। इत्य तत कवचम दिव्यम सौरे निर्मित पुरा जन्म लग्न स्थिता दोषा सर्वान नाश्यते प्रभु इति शनि कवच संपूर्णं ॥ 20