भगवान कृष्ण नाम मंत्र
राधे कृष्ण
सांसारिक वैराग्य, माधुर्य भक्ति का उदय एवं संसार के तीनों तापों (दैहिक, दैविक, भौतिक) से मुक्ति।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
सांसारिक वैराग्य, माधुर्य भक्ति का उदय एवं संसार के तीनों तापों (दैहिक, दैविक, भौतिक) से मुक्ति।
इस मंत्र से क्या होगा?
सांसारिक वैराग्य, माधुर्य भक्ति का उदय एवं संसार के तीनों तापों (दैहिक, दैविक, भौतिक) से मुक्ति
जाप विधि
तुलसी माला पर प्रतिदिन निरंतर जप या युगल छवि के सम्मुख बैठकर मानसिक स्मरण।
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ॐ नमो भगवती वद वद वाग्देवी स्वाहा
gyan mantraज्ञानम् आनंद मयं देवं निर्मल स्पटिकाकृतिम् । आधारं सर्व विद्यानां हयग्रीवं उपास्मे ॥
stotra mantraन विद्यते यस्य न जन्म कर्म वा न नाम रूपे गुणदोष एव वा । तथापि लोकाप्ययसम्भवाय यः स्वमायया तान्यनुकालमृच्छति ॥ 4
tantrik mantraॐ धूम्र लोचनी उग्र रूपिनी सकल विष्छेदिनी सकल विष संचय नाशय नाशय मारय मारय विषमज्वर ताप ज्वर शीत ज्वर वात ज्वर लूत ज्वर पयत्य ज्वर श्लेष्म ज्वर मोह ज्वर संदीपात ज्वर प्रेत ज्वर पिशाच ज्वर कृत्रिम ज्वर सकल रोग निवारिणी सकल ग्रह छेदिनी धूं धूं धूं धूं धूं धूमावती माम रक्षा रक्ष शीघ्रम शीघ्रमाच्छा गच्छ क्षिप्रमेव आरोग्यम कुरु कुरु हुम फट धूम धूम धूमावती स्वाहा
sabar mantraकाल भैरव का जो नाम ले नर नारी उसके लिए मूठ कभी ना पड़े भारी जय जय काल भैरव देव मूठ चली हवा बनकर काल भैरव चले ढाल बनकर अष्ट हाथ भैरव जी के फैले काट दी जड़ मूठ की चढ़ा दी आकाश नीचे काटी ऊपर काटी काट दी पाताल में 11
kaamya mantraॐ ऐं श्रीं महालक्ष्म्यै कमल-वारिण्यै गरुड़ वाहिन्यै श्रीं ह्रीं ऐं स्वाहा।