माँ दुर्गा नाम मंत्र
भ्रामरी
भयंकर महामारियों से रक्षा एवं शत्रुओं का भ्रामरी शक्ति द्वारा शमन।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
भयंकर महामारियों से रक्षा एवं शत्रुओं का भ्रामरी शक्ति द्वारा शमन।
इस मंत्र से क्या होगा?
भयंकर महामारियों से रक्षा एवं शत्रुओं का भ्रामरी शक्ति द्वारा शमन
जाप विधि
भ्रमरों (भंवरों) की ध्वनि का ध्यान करते हुए मानसिक जप।
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ॐ त्वं नो अग्ने महोभिः पाहि विश्वस्या अरातेः । उत द्विषो मर्त्यस्य ॥
shanti mantraलोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
sabar mantraधन जैसे चुंबक खींचे लोह गोरख की आज्ञा टले नहीं मिटे साधक का मोह कीड़ा जागे पिंगला जागे सुष्मना का खुले द्वार जब तीनों नाड़ी जागे धन आवे बारंबार जैसे गंगा बहे अविरल जैसे सूरज देत उजास वैसे मेरे घर में लक्ष्मी करे सदा ही वास रुका धन चले बंद धन खुले आवे चहुं ओर से धन गोरख का शब्द सांचा रे सांचा रे गुरु का मन काल का भी काल है गोरख तीनों लोक बसेरा जो गोरख का नाम ले साधक उसका होए उजेरा उठ उठ लक्ष्मी आव बैठ मेरे द्वार गोरख की आज्ञा लेकर आव कर मेरा उद्धार शब्द सांचा पिंड कांचा सांची गुरु की बानी हुकुम गोरखनाथ का चले यही नाथ की निशानी 5
gyan mantraसरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि । विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा ॥
kaamya mantraविद्याः समस्तास्तव देवि भेदाः स्त्रियः समस्ताः सकला जगत्सु। त्वयैकया पूरितमम्बयैतत् का ते स्तुतिः स्तव्यपरा परोक्तिः॥
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