माँ दुर्गा नाम मंत्र
भ्रामरी
भयंकर महामारियों से रक्षा एवं शत्रुओं का भ्रामरी शक्ति द्वारा शमन।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
भयंकर महामारियों से रक्षा एवं शत्रुओं का भ्रामरी शक्ति द्वारा शमन।
इस मंत्र से क्या होगा?
भयंकर महामारियों से रक्षा एवं शत्रुओं का भ्रामरी शक्ति द्वारा शमन
जाप विधि
भ्रमरों (भंवरों) की ध्वनि का ध्यान करते हुए मानसिक जप।
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ॐ सर्वेषां स्वस्तिर्भवतु । सर्वेषां शान्तिर्भवतु । सर्वेषां पूर्णं भवतु । सर्वेषां मङ्गलं भवतु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
kavach mantraनासां वैवस्वत: पातु मुखं मे भास्कर: सदा । नाभिं गृहपति: पातु मन्द: पातु कटिं तथा । पदौ मन्दगति: पातु सर्वांग पातु पिप्पल: । आंगो पांगानी सर्वानी रक्षे में सूर्य नंदन इत्तेत कवच देव पठे सूर्य सुतस्य यह नतस्य जायते पीडा प्रीतो भवति सूर्य जह व्यय जन्म द्वितीय मृत्यु स्थान गतो पिवा कलस्थो गतो वापी सुप्रीतु सदाशनी अष्टमस्थे सूर्यसुते व्यये जन्म द्वितीयगे। कवचं पठते नित्यं न पीडा जायते क्वचित्। इत्य तत कवचम दिव्यम सौरे निर्मित पुरा जन्म लग्न स्थिता दोषा सर्वान नाश्यते प्रभु इति शनि कवच संपूर्णं ॥ 20
sabar mantraॐ पीर बजरंगी राम लक्ष्मण के संगी, जहां जहां जाए, फतह के डंके बजाये, दुहाई माता अञ्जनि की आन 9
beej mantraरां
dhyan mantraवसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम्। देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्॥
gyan mantraतत्त्वमसि