भगवान हयग्रीव काम्य मंत्र
ज्ञानानन्दमयं देवं निर्मलस्फटिकाकृतिम्। आधारं सर्वविद्यानां हयग्रीवमुपास्महे॥
असाधारण ज्ञान, मेधा, बुद्धि में वृद्धि और सभी प्रकार की कठिन विद्याओं में पारंगत होना 20।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
असाधारण ज्ञान, मेधा, बुद्धि में वृद्धि और सभी प्रकार की कठिन विद्याओं में पारंगत होना 20।
इस मंत्र से क्या होगा?
असाधारण ज्ञान, मेधा, बुद्धि में वृद्धि और सभी प्रकार की कठिन विद्याओं में पारंगत होना
जाप विधि
विद्यार्थियों द्वारा नित्य प्रातःकाल विद्याध्ययन से पूर्व एकाग्रचित्त होकर जप किया जाए 20।
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अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्। सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥
vaidik mantraॐ सूर्याचन्द्रमसौ धाता यथा पूर्वमकल्पयत् । दिवं च पृथिवीं च अन्तरिक्षमथो स्वः ॥
stotra mantraद्वैपायनो भगवानप्रबोधाद् बुद्धस्तु पाखण्डगणात् प्रमादात्। कल्किः कले कालमलात् प्रपातु धर्मावनायोरूकृतावतारः।। 7
navgrah mantraॐ शं नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये। शं योरभि स्रवन्तु न:।।
bhakti mantraगणेश शरणं शरणं गणेश
shanti mantraॐ स्वस्ति प्रजाभ्यः परिपालयन्तां न्यायेन मार्गेण महीं महीशाः । गोब्राह्मणेभ्यः शुभमस्तु नित्यं लोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥