भगवान हयग्रीव काम्य मंत्र
ज्ञानानन्दमयं देवं निर्मलस्फटिकाकृतिम्। आधारं सर्वविद्यानां हयग्रीवमुपास्महे॥
असाधारण ज्ञान, मेधा, बुद्धि में वृद्धि और सभी प्रकार की कठिन विद्याओं में पारंगत होना 20।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
असाधारण ज्ञान, मेधा, बुद्धि में वृद्धि और सभी प्रकार की कठिन विद्याओं में पारंगत होना 20।
इस मंत्र से क्या होगा?
असाधारण ज्ञान, मेधा, बुद्धि में वृद्धि और सभी प्रकार की कठिन विद्याओं में पारंगत होना
जाप विधि
विद्यार्थियों द्वारा नित्य प्रातःकाल विद्याध्ययन से पूर्व एकाग्रचित्त होकर जप किया जाए 20।
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ॐ ह्रीं श्रीं शर्वाय नमः
vaidik mantraॐ येन कर्मण्यपसो मनीषिणो यज्ञे कृण्वन्ति विदथेषु धीराः । यदपूर्वं यक्षमन्तः प्रजानां तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु ।।
dhyan mantraकस्तूरीतिलकं ललाटपटले वक्षःस्थले कौस्तुभं नासाग्रे नवमौक्तिकं करतले वेणुं करे कङ्कणम्। सर्वाङ्गे हरिचन्दनं सुललितं कण्ठे च मुक्तावलिं गोपस्त्रीपरिवेष्टितो विजयते गोपालचूडामणिः॥
mool mantraॐ सोमाय स्वाहा
stotra mantraयथार्चिषोsग्नेः सवितुर्गभस्तयो निर्यान्ति संयान्त्यसकृत् स्वरोचिषः । तथा यतोsयं गुणसंप्रवाहो बुद्धिर्मनः खानि शरीरसर्गाः ॥ 4
navgrah mantraॐ अन्नात्परिस्त्रुतो रसं ब्रह्मणा व्यपिबत् क्षत्रं पय: सोमं प्रजापति:। ऋतेन सत्यमिन्द्रियं विपानं शुक्रमन्धस इन्द्रस्येन्द्रियमिदं पयोऽमृतं मधु।।