भगवान विष्णु नाम मंत्र
अनंत
असीम ज्ञान की प्राप्ति, सभी प्रकार की सीमाओं और बंधनों से मुक्ति एवं विशाल दृष्टिकोण।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
असीम ज्ञान की प्राप्ति, सभी प्रकार की सीमाओं और बंधनों से मुक्ति एवं विशाल दृष्टिकोण।
इस मंत्र से क्या होगा?
असीम ज्ञान की प्राप्ति, सभी प्रकार की सीमाओं और बंधनों से मुक्ति एवं विशाल दृष्टिकोण
जाप विधि
खुले आकाश की ओर दृष्टि कर वैखरी या मानसिक जप।
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ह्रीं
kavach mantraनासां वैवस्वत: पातु मुखं मे भास्कर: सदा । नाभिं गृहपति: पातु मन्द: पातु कटिं तथा । पदौ मन्दगति: पातु सर्वांग पातु पिप्पल: । आंगो पांगानी सर्वानी रक्षे में सूर्य नंदन इत्तेत कवच देव पठे सूर्य सुतस्य यह नतस्य जायते पीडा प्रीतो भवति सूर्य जह व्यय जन्म द्वितीय मृत्यु स्थान गतो पिवा कलस्थो गतो वापी सुप्रीतु सदाशनी अष्टमस्थे सूर्यसुते व्यये जन्म द्वितीयगे। कवचं पठते नित्यं न पीडा जायते क्वचित्। इत्य तत कवचम दिव्यम सौरे निर्मित पुरा जन्म लग्न स्थिता दोषा सर्वान नाश्यते प्रभु इति शनि कवच संपूर्णं ॥ 20
dhyan mantraॐ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मा अमृतं गमय। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
navgrah mantraॐ ह्रां क्रीं टं ग्रहनाथाय बुधाय स्वाहा॥
jap mantraॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै। तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
mool mantraॐ वायुदेवाय नमः