शांति प्रदायक मंत्र
13 मंत्रॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः । वनस्पतयः शान्तिर्विश्वेदेवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वं शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
इस मंत्र का सर्वोपरि प्रयोजन व्यक्तिगत शांति की सीमाओं को लांघकर संपूर्ण ब्रह्मांडीय संतुलन और वातावरणीय शुद्धि स्थापित करना है। इसका उपयोग तब किया जाता है जब म…
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्माऽमृतं गमय ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
इस शांति मंत्र का मूल प्रयोजन साधक के भीतर अज्ञानता जनित मानसिक अंधकार, अनिश्चितताओं के भय और मृत्यु-भय से उत्पन्न होने वाले गहरे मनोवैज्ञानिक तनाव (anxiety and…
ॐ स्वस्ति प्रजाभ्यः परिपालयन्तां न्यायेन मार्गेण महीं महीशाः । गोब्राह्मणेभ्यः शुभमस्तु नित्यं लोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
इस शांति मंत्र का मुख्य प्रयोजन योगाभ्यास के दौरान शरीर और नाड़ी तंत्र में उत्पन्न हुई प्रचंड ऊर्जा (Pranic energy) को शांत, संतुलित और सील (seal) करना है 31। य…
लोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
इस शांति मंत्र का विशिष्ट प्रयोजन मन की असीम शांति का अनुभव करना, हृदय में बिना शर्त प्रेम (unconditional love) और करुणा का संचार करना, तथा व्यक्तिगत मानसिक चिं…
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
इस त्रिविध शांति मंत्र का प्रत्यक्ष और अचूक प्रयोजन दैहिक (शारीरिक और मानसिक रोग/विकार), दैविक (प्राकृतिक या ब्रह्मांडीय आपदाएं और अदृश्य शक्तियां), और भौतिक (म…
ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पुर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
इस शांति पाठ का विशिष्ट प्रयोजन मानव मन में व्याप्त अभाव, अपूर्णता और हीन भावना (scarcity mindset) से उत्पन्न होने वाले तनाव और असंतोष को पूर्णतः नष्ट करना है 1…
ॐ सह नाववतु । सह नौ भुनक्तु । सह वीर्यं करवावहै । तेजस्विनावधीतमस्तु मा विद्विषावहै ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
इस मंत्र का प्रमुख प्रयोजन पारस्परिक संबंधों में उत्पन्न होने वाले द्वेष, वैचारिक मतभेद, और मानसिक उद्वेग (friction and cognitive dissonance) को शांत करना है 17…
ॐ शं नो मित्रः शं वरुणः । शं नो भवत्वर्यमा । शं न इन्द्रो बृहस्पतिः । शं नो विष्णुरुरुक्रमः । नमो ब्रह्मणे । नमस्ते वायो । त्वमेव प्रत्यक्षं ब्रह्मासि । त्वामेव प्रत्यक्षं ब्रह्म वदिष्यामि । ऋतं वदिष्यामि । सत्यं वदिष्यामि । तन्मामवतु । तद्वक्तारमवतु । अवतु माम् । अवतु वक्तारम् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
इस शांति मंत्र का विशिष्ट प्रयोजन प्रकृति की सूक्ष्म और विराट शक्तियों (मित्र, वरुण, अर्यमा, इंद्र, बृहस्पति, वायु) के साथ शरीर की ऊर्जा का संतुलन स्थापित कर आध…
ॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवाः । भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः । स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवागँसस्तनूभिः । व्यशेम देवहितं यदायूः । स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः । स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः । स्वस्ति नस्ताक्षर्यो अरिष्टनेमिः । स्वस्ति नो वृहस्पतिर्दधातु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
इस शांति मंत्र का सर्वोपरि प्रयोजन हमारी ज्ञानेन्द्रियों (विशेषकर श्रवण और दृष्टि) और कर्मेंद्रियों को शुद्ध, शांत और सकारात्मक ऊर्जा की ओर प्रवृत्त करना है 18।…
ॐ वाङ् मे मनसि प्रतिष्ठिता । मनो मे वाचि प्रतिष्ठितम् । आविरावीर्म एधि । वेदस्य म आणीस्थः । श्रुतं मे मा प्रहासीः । अनेनाधीतेनाहोरात्रान्सन्दधामि । ऋतं वदिष्यामि । सत्यं वदिष्यामि । तन्मामवतु । तद्वक्तारमवतु । अवतु माम् । अवतु वक्तारम् । अवतु वक्तारम् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
इस शांति पाठ का केंद्रीय प्रयोजन वाणी (कथन) और मन (विचार) के मध्य उत्पन्न होने वाले असंतुलन और अंतर्द्वंद्व (cognitive dissonance) को पूर्णतः शांत करना है 18। ज…
ॐ आप्यायन्तु ममाङ्गानि वाक्प्राणश्चक्षुः श्रोत्रमथो बलमिन्द्रियाणि च सर्वाणि । सर्वं ब्रह्मोपनिषदं माहं ब्रह्म निराकुर्यां मा मा ब्रह्म निराकरोदनिराकरणमस्त्वनिराकरणं मे अस्तु । तदात्मनि निरते य उपनिषत्सु धर्मास्ते मयि सन्तु ते मयि सन्तु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
इस मंत्र का प्राथमिक प्रयोजन शारीरिक अंगों, प्राण ऊर्जा, और इंद्रियों की चंचलता को शांत कर उन्हें आध्यात्मिक बल और स्थिरता प्रदान करना है 12। ध्यान या साधना के…
ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः । सर्वे सन्तु निरामयाः । सर्वे भद्राणि पश्यन्तु । मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
इस पारंपरिक स्तुति का मूल प्रयोजन साधक के भीतर से स्वार्थ, संकीर्णता और अहंकार को मिटाकर सार्वभौमिक करुणा (universal compassion) और असीम मानसिक शांति का विस्तार…
ॐ सर्वेषां स्वस्तिर्भवतु । सर्वेषां शान्तिर्भवतु । सर्वेषां पूर्णं भवतु । सर्वेषां मङ्गलं भवतु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
इस शांति मंत्र का सर्वोच्च प्रयोजन मन की पूर्ण शांति, चारों ओर के वातावरण में संतुलन, और नकारात्मक विचारों का पूर्णतः शमन करना है 11। यह मंत्र विशेष रूप से तब उ…