लोकमार्कण्डेय पुराण में गंगा की चार धाराओं का वर्णन कैसे है?मार्कण्डेय पुराण में गंगा की चार धाराओं का विस्तृत भौगोलिक मार्ग बताया गया है — सीता (पूर्व-भद्राश्व), अलकनंदा (दक्षिण-भारतवर्ष), चक्षु (पश्चिम-केतुमाल), सोमा (उत्तर-उत्तरकुरु)।#मार्कण्डेय पुराण#गंगा#चार धाराएँ
लोकअलकनंदा को भागीरथी क्यों कहते हैं?अलकनंदा को भागीरथी इसलिए कहते हैं क्योंकि महाराज भगीरथ की घोर तपस्या से यह पृथ्वी पर अवतरित हुई और भगीरथ के रथ का अनुसरण करती हुई भारतवर्ष में आई।#अलकनंदा
लोकभूलोक पर गंगा की कितनी धाराएँ हैं?गंगा मेरु पर्वत से चार धाराओं में बँटती हैं — सीता (पूर्व), अलकनंदा/भागीरथी (दक्षिण), चक्षु (पश्चिम) और सोमा/भद्रा (उत्तर)।#गंगा#चार धाराएँ#सीता
तीर्थ स्थलरुद्रप्रयाग संगम क्यों पवित्र?उत्तराखंड — मंदाकिनी+अलकनंदा संगम। शिव रुद्र तांडव+नारद तपस्या। पंचप्रयाग में चौथा। केदारनाथ मार्ग। रुद्रनाथ मंदिर।#रुद्रप्रयाग#संगम#मंदाकिनी