तंत्र साधनाधूमवती मंत्र जपने का समयधूमावती साधना हमेशा अमावस्या या मध्यरात्रि में एकांत स्थानों पर की जाती है। गृहस्थों के लिए इस मंत्र का जप वर्जित माना गया है, यह मुख्यतः संन्यासियों के लिए है।#धूमवती#अलक्ष्मी#अघोर
परिचय और स्वरूपमाँ धूमावती को अलक्ष्मी या ज्येष्ठा क्यों कहते हैं?माँ धूमावती = अलक्ष्मी (लक्ष्मी की विपरीत) और ज्येष्ठा (दुर्भाग्य की देवी)। लक्ष्मी = सौभाग्य-समृद्धि; धूमावती = दुर्भाग्य-अभाव-कुरूपता का प्रतिनिधित्व। सांसारिक मोह के त्याग का प्रतीक।#अलक्ष्मी#ज्येष्ठा#दुर्भाग्य देवी
क्षीरसागर मंथनअलक्ष्मी (ज्येष्ठा) कौन हैं?अलक्ष्मी (ज्येष्ठा) = दरिद्रता, कलह और दुर्भाग्य की अधिष्ठात्री। मलिन वस्त्र, लाल नेत्र, बूढ़ी, दंतहीन, भयंकर। मंथन में शुभ से पहले विकार-विष निकलते हैं — यह गहरा मनोवैज्ञानिक सत्य है।#अलक्ष्मी#ज्येष्ठा#दरिद्रता