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अस्थि विसर्जन से जुड़े सभी प्रश्न(3)

अस्थि विसर्जन पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 3 प्रश्न उपलब्ध हैं।

श्राद्ध एवं पितृ कर्म

हरिद्वार में अस्थि विसर्जन कैसे करें

हर की पैड़ी/गंगा घाट → पंडा से संपर्क → गंगा स्नान → मंत्रोच्चार → तिल-जल तर्पण → अस्थि गंगा में → पिंडदान → दान। पंडा कुल रजिस्टर रखता है। विश्वसनीय पंडा चुनें; पर्यावरण अनुकूल विसर्जन।

#हरिद्वार#अस्थि विसर्जन#गंगा
श्राद्ध एवं पितृ कर्म

अस्थि विसर्जन का सबसे उत्तम स्थान कौन सा

प्रयागराज (सर्वश्रेष्ठ) > हरिद्वार > वाराणसी > गंगासागर > गोदावरी/नर्मदा > कोई नदी। गया = पिंडदान सर्वोत्तम। गंगा = सबसे पुण्यदायक।

#अस्थि विसर्जन#उत्तम स्थान#गंगा
अन्त्येष्टि संस्कार

गंगा में अस्थि विसर्जन का क्या विशेष महत्व है?

गंगा अस्थि: मोक्षदायिनी (गरुड़ पुराण), विष्णु पादोदक (चरण स्पर्श), पापनाश, पुनर्जन्म मुक्ति। स्थान: हरिद्वार, प्रयागराज, काशी (शिव तारक मंत्र), गंगासागर। 3-10 दिन में। 'ॐ' सहित विसर्जन→तर्पण→पिण्डदान।

#अस्थि विसर्जन#गंगा#मोक्ष
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