पुरश्चरणपुरश्चरण का आध्यात्मिक महत्व क्या है?
मंत्रमहार्णव: पुरश्चरण-सिद्ध साधक का मंत्र और साधक — दोनों एक साथ सिद्ध। सात आयाम: मंत्र-देवता जीवंत संबंध, अहंकार-विसर्जन, चित्त-स्थिरता, कर्म-क्षय, तीनों ऋण-मुक्ति, शक्तिपात की पात्रता, मोक्ष-मार्ग त्वरण। पुरश्चरण = शरीर-मन की तीर्थयात्रा।
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