लोकइंद्र ने दुर्वासा की माला ऐरावत को क्यों दे दी?इंद्र ने अहंकार और असावधानी में दिव्य माला ऐरावत के मस्तक पर डाल दी।#इंद्र अहंकार#दुर्वासा माला#ऐरावत
शिव-पार्वती तत्त्व: दार्शनिक रहस्यकेनोपनिषद में 'उमा हैमवती' का क्या आख्यान है?केनोपनिषद: देवताओं को अहंकार हुआ कि विजय उनके बल से। परब्रह्म यक्ष रूप में प्रकट — अग्नि तिनका न जला सके, वायु उड़ा न सके, इंद्र का अहंकार टूटा। तब 'उमा हैमवती' प्रकट हुईं और बताया: 'सब शक्ति ब्रह्म की है।' वे 'ब्रह्म-विद्या' का स्वरूप हैं।#केनोपनिषद
क्षीरसागर मंथनदुर्वासा के शाप से क्या हुआ?इंद्र ने दुर्लभ पुष्पमाला को ऐरावत के मस्तक पर रखा → ऐरावत ने कुचला → दुर्वासा का शाप: तीनों लोक श्रीहीन। परिणाम: स्वर्ग की कांति लुप्त, वनस्पतियाँ सूखीं, यज्ञ बंद, असुरों का अधिकार।#दुर्वासा शाप#इंद्र अहंकार#श्रीहीन