पर्वअन्नकूट उत्सव में गोवर्धन पर्वत बनाने की विधि क्या हैगोवर्धन विधि: गाय गोबर से लेटे पुरुष (गिरिराज) बनाएँ → नाभि पर कटोरा (दूध/दही) → फूल-तुलसी सजाएँ → पूजा → 56 भोग (छप्पन) अर्पण → 7 परिक्रमा → गाय पूजा। भागवत: कृष्ण ने इन्द्र के बजाय गोवर्धन पूजा कराई।#अन्नकूट#गोवर्धन#गोबर
त्योहार पूजाहोलिका दहन में गोबर के उपले क्यों जलाते हैं?उपले: गोमय=पवित्रतम ईंधन (33 करोड़ देवता), वायु शुद्धि (NBRI: जीवाणुनाशक धूम), ऋतु परिवर्तन शुद्धि (शीत→वसंत), कृषि (नई फसल भूनना=होला), पर्यावरण मित्र (renewable)। भरभोलिये=सामुदायिक एकता।
हवन एवं यज्ञअग्निहोत्र में गोबर के कंडे क्यों जलाते हैंगोबर कण्डे जलाने के कारण: (1) गाय पवित्र — पंचगव्य शास्त्र सम्मत। (2) धीमी-स्थिर अग्नि — यज्ञ हेतु उपयुक्त। (3) वायु शुद्धिकरण — कुछ शोधों में ऑक्सीजन वृद्धि और जीवाणु नाश पाया गया। (4) कम धुआँ। (5) ग्रामीण भारत में सर्वसुलभ। देशी गाय के पूर्णतः सूखे कण्डे प्रयोग करें।#अग्निहोत्र#गोबर#कंडे