रामचरितमानस — बालकाण्डसीताजी ने जयमाला पहनाते समय कैसा अनुभव किया?सकुचाहट + प्रेम + आनन्द — गुरुजनों की लाज से सकुचाईं पर धीरज धरा। मन में कहा — 'तन मन बचन मोर पनु साचा। रघुपति पद सरोज चित राचा' — मेरा प्रण सच्चा है, चित्त रघुपति के चरणों में अनुरक्त है।#बालकाण्ड#सीता भाव#जयमाला
रामचरितमानस — बालकाण्डसीताजी ने जयमाला किसे पहनाई?श्रीरामचन्द्रजी को — सखियों के साथ रंगभूमि में आकर। गुरुजनों की लाज से सकुचाती थीं पर हृदय में रामजी को रखकर प्रेमपूर्वक जयमाला पहनाई। सारे ब्रह्माण्ड में आनन्द छा गया।#बालकाण्ड#जयमाला
रामचरितमानस — बालकाण्डधनुष भंग के बाद सीताजी ने क्या किया?सीताजी ने चकित होकर रामजी को देखा — नेत्र अपना खजाना पाकर स्थिर हो गये। सखियों ने सीताजी को रामजी के समीप ले जाकर जयमाला पहनवायी। गुरुजनों की लाज से सकुचाती थीं पर हृदय में आनन्द था।#बालकाण्ड#सीता#जयमाला